गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से 30 मासूमों समेत 45 से भी अधिक लोगों की मौत के बाद भी जिला अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। नींद से जगे अफसरों ने दूसरे दिन शनिवार को अस्पताल के हर वार्ड में ऑक्सीजन सिलेंडर रखवा दिए। खाली पड़े सिलेंडरों को भरवा दिया गया। जिला अस्पताल के साथ महिला और महिला अस्पतालों में भी ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कराई गई है।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में 45 से अधिक मौतों के बाद प्रतापगढ़ में भी शुक्रवार दोपहर बाद लापरवाही देखने को मिली थी। ऑक्सीजन के अभाव में जेठवारा के उदापुर निवासी रिटायर्ड दरोगा
महेंद्र प्रताप सिंह तड़प रहे थे। दमा की बीमारी होने के चलते उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। डाक्टरों के कहने पर नर्स ने उन्हें आक्सीजन सिलेंडर जरूर लगाया, लेकिन तुरंत वह खत्म हो गया। महेंद्र के बेटे का आरोप था कि कई बार गुहार लगाने के बाद पाइन लाइन के जरिए आक्सीजन की सप्लाई नहीं शुरू की गई। इस दौरान डा. आरडी द्विवेदी पहुंचे तो मीडिया कर्मियों को देखकर उन्होंने तत्काल ऑक्सीजन पाइप लाइन में सप्लाई शुरू कराई। इसके अलावा जिला अस्पताल में कई सिलेंडर खाली पड़े थे। ‘अमर उजाला’ ने इससे संबंधित खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की। खबर का असर रहा कि शनिवार को सात छोटे सिलेंडरों में आक्सीजन भरवाकर अस्पताल प्रशासन ने आननफानन में सभी वार्डों में रखवा दिया। वहीं महिला अस्पताल में 14 छोटे और बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर रखवाए गए हैं। इससे अब मरीजों को ऑक्सीजन के अभाव नहीं तड़पना होगा।
जिला व महिला अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए किसी को ठेका नहीं दिया गया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग खुद सिलेंडर भरवाता है। जीआईसी के सामने स्थित मुनीर इंटर प्राइजेज फर्म से स्वास्थ्य विभाग छोटा सिलेंडर 150 रुपये में भरवाता है। फर्म के संचालक मोहम्मद शरीफ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑक्सीजन का भुगतान कर दिया गया है। कुछ बचा है जो कागजी कोरम पूरा होने के बाद हो जाएगा। इसके चलते ऑक्सजीन खत्म होते ही जिला व महिला अस्पताल से सिलेंडर आ जाता है। उसे तत्काल भरवाकर भेज दिया जाता है।
पुराने इमरजेंसी में 35 से अधिक बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर भरकर रखवा दिए गए हैं। इसके साथ ही आईसीयू जनरेटर पैनल के पास, आंख के डॉक्टर के बगल सहित चार स्थानों पर पाइप लाइन ऑक्सीजन का प्लांट बनाया गया है। जहां से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मानी जाए तो सभी प्लांट के खाली पड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों को भरवाकर रखवा दिया गया है।