लाखों रुपये खर्च कर अगस्त 2025 में पट्टी और लालगंज के 50-50 बेड के अस्पताल बनाए गए ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसके बाद भी एक साल से अस्पताल बनकर तैयार है लेकिन संचालन नहीं सका। अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ का इंतजार है।
इन दोनों अस्पतालों का संचालन न होने करीब 140 गांवों की 70 हजार की आबादी इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों के चक्कर लगा रही है। पट्टी में इमरजेंसी में आए मरीजों को 30 किमी दूर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
लालगंज में बनाए गए 50 बेड के महिला अस्पताल के शुरू न होने गर्भवती महिलाओं, बच्चियों और वृद्धा महिलाओं मेडिकल कॉलेज की दौरड़ लगानी पड़ती है। यहां पर अभी तक स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो सकी है। महिलाएं निजी अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर हैं। अफसरों का कहना है कि फिलहाल ओपीडी चल रही है, आईपीडी शुरू नहीं हुई है।
लालगंज में स्टाफ की होनी है तैनाती
स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन महिला डॉक्टर, एनेस्थीसिया और बाल रोग विशेषज्ञ। वार्डबॉय, स्वीपर और नर्सिंग स्टाफ।
ये जांचें होंगी
- रक्त की जांच एवं सीबीसी, टीएलसी, डीएलसी जांच।
-शुगर, मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी जांच।
- लिवर और किडनी से जुड़े सामान्य फंक्शन टेस्ट
वर्जन-
15 दिनों में लालगंज महिला अस्पताल में आईपीडी शुरू कर दी जाएगी। ओपीडी संचालित है। सीएमओ के माध्यम से शासन से स्टाफ की मांग की गई। डॉ. अरविंद गुप्ता, सीएचसी अधीक्षक लालगंज।
वर्जन
पट्टी सीएचसी को मॉडल का दर्जा मिल गया है। जल्द ही 50 बेड अस्पताल में भर्ती शुरू होगी। सभी रोगों के विशेषज्ञ को भी तैनात किया जाएगा। शासन को पत्राचार किया गया है। - डॉ. एस हैदर, डिप्टी सीएमओ।