इस बार ग्रह और नक्षत्रों ने होली के रंग को गहरा कर दिया है। इनके संयोग से इस बार होली एक नहीं दो दिन मनेगी। 22 मार्च की रात में तीन बजे के बाद यानि 23 की भोर में होलिका दहन होगा। उस दिन पूरा दिन और दूसरे दिन 24 मार्च को होली ही है। वैसे तो कई जनपदों में होली कई दिनों तक मनाई जाती है। इलाहाबाद और कानपुर में सप्ताह भर रंग चलने का रिवाज है। लेकिन प्रतापगढ़ में होली एक ही दिन मनाई जाती है। मगर इस बार ग्रहों और नक्षत्रों ने होलिका दहन का मुहूर्त 22 मार्च की रात तीन बजे के बाद निकाला है। जिससे 23 और 24 दो दिन होली की संभावना बनती नजर आ रही है। जनपदवासी इसको एक दिन मनाते हैं या दो दिन, यह तो बाद में पता चलेगा। पंडित रामराज शास्त्री बताते हैं कि होलिका दहन का मुहूर्त 22 मार्च को रात में तीन बजे का है।
होलिका दहन से पहले करें पूजा
होलिका दहन करने से पहले उसकी परिक्रमा और पूजन की परंपरा रही है। धार्मिक ग्रंथों की मान्यता के अनुसार हरि भक्त प्रह्लाद को भस्म करने की मंशा से उनकी बुआ होलिका गोद में लेकर जलती हुई आग में बैठ गई थीं। प्रहलाद बच गए, मगर उनकी बुआ भस्म हो गई थीं। तभी से होली का पर्व मनाया जाने लगा।
कपूर और इलायची की गंध से स्वाइन फ्लू के वायरस का खात्मा
होलिका दहन के समय कपूर और छोटी इलायची जलाएं। आयुर्वेद के डॉक्टरों के अनुसार होलिका दहन के समय उठने वाले धुएं में शामिल इसकी खुश्बू से वायुमंडल और आस-पास के स्वाइन फ्लू के वायरस मर जाते हैं।