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दिलों को जोड़ता है पट्टी का ऐतिहासिक मेला

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पट्टी रामलीला मैदान में लगे तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले में पहुंचे लोग। - फोटो : PRATAPGARH
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दिलों को जोड़ता है पट्टी का ऐतिहासिक मेला
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समरसता और सौहार्द की मिसाल, मनोरंजन से घर-गृहस्थी तक के सामानों का होता है इंतजाम
शिवगढ़। पट्टी का ऐतिहासिक दशहरा मेला सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है। यह आयोजन दिलों को सभी को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। सौ साल पुराने इस मेले की विविधता, सद्भाव और समसता ने लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है। यही वजह रही कि समरसता का पाठ पढ़ाने वाले इस मेले की उम्र के साथ रौनक भी बढ़ती गई और चाहने वाले भी जुड़ते चले गए। खाने-पीने के स्वादिष्ट लजीज व्यंजनों के साथ ही मेले में घर गृहस्थी के सारे सामनों के अलावा बच्चों के मनोरंजन के झूले, सर्कस यहां सबकुछ मिलेगा। यह मेला तनावपूर्ण होते रिश्तों के दौर में आपसी सद्भाव, प्रेम का बड़ा संदेश भी देता है। मेले की आयोजन समिति में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूती प्रदान करती है। कई जनपदों के दुकानदार यहां के आपसी भईचारे और सौहार्द्र को देखकर कहते हैं कि मेले ने मिल-जुलकर रहना सिखाया। पट्टी का मेला दिलों का मेला है।
पट्टी के ऐतिहासिक दशहरे मेले की शुरुआत पुलिसकर्मी सेवाराम ने की थी। उनके दिल में इस मेंले की संकल्पना, सोच, भाईचारे का भाव ऐसा बना कि आज भी उनके इस प्रयास को लोग याद करते हैं। जब भी इस मेले की शुरुआत होती है उनका नाम लोगों की जुबान पर आ जाता है। रिश्तों की इस डोर ने आज भी उनके इस कार्य को सहेज कर रखा है। यह मेला विविधताओं से भरा है। प्रतापगढ़ के अलावा बनारस, कानपुर, प्रयागराज, जौनपुर, बस्ती, सहारनपुर, गोंडा सहित अन्य जनपदों के व्यापारी यहां व्यवसाय करने आते हैं। 30वर्ष से मेले में आ रहे जूते के दुकानदार रईस बताते हैं कि मेले से अच्छी आमदनी हो जाती है। मेला समिति का सहयोगी रवैया व सुरक्षा के कारण उन्हें हर साल मेले में आने का इंतजार रहता है। सर्कस, झूला के बबलू कहते हैं कि कई जगहों पर हम लोग गए, लेकिन इस मेले जैसी व्यवस्था कहीं नहीं मिली। प्रशासन व रामलीला कमेटी द्वारा सुरक्षा सहयोग सराहनीय रहता है। हमें लगता है हम अपने घर में हैं। वर्तमान समय में पूरा मेला ग्राउंड आकर्षक रूप से सज गया है। रंग-बिंरगी पंडाल मेले को भव्यता प्रदान कर रहे हैं। कपड़े,सौंदर्य प्रसाधन, लकड़ी के दुकानदारों के यहां धीरे-धीरे भीड़ बढ़ रही है। शनिवार के दिन बच्चों की भीड़ झूलों पर दिखी।
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पट्टी में अमन-चैन कायम रखना सबकी जिम्मेदारी : मोती सिंह
शिवगढ। प्रदेश के काबीना मंत्री मोती सिंह ने कहा है कि पट्टी के ऐतिहासिक दशहरा मेले को सकुशल रूप से सम्पन्न कराने में समिति के पदाधिकारियों के अलावा कस्बे के हिंदू, मुस्लिम,अधिवक्ता राजनैतिक दल सभी का सहयोग रहता है। यह अनूठी मिसाल है। पिछले कुछ वर्षों में इस मेले के सौहार्द्र को बिगाडने की कोशिश कुछ शरारती लोगों द्वारा हुई, लेकिन समरसता, सौहार्द्र, विश्वास के मजबूत बंधन के आगे उनकी कोशिश बेकार हो गई। मेले में आपसी रिरश्तों की मजबूत डोर कायम रही। आज उसी संकल्प के बूते पट्टी के इस मेले को इस बार और अधिक खूबसूरती दी गई। सूबे के कैबिनेट मंत्री मोती सिंह ने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि पट्टी के सौहार्द्र को बिगाडने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। अपील करते हुए कहा कि हम सभी का दायित्व बनता है कि पट्टी का नाम बदनाम न हो, यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।
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भरत मिलाप के दिन निकलेंगी आकर्षक चौकियां
पट्टी (ब्यूरो)। पट्टी के ऐतिहासिक दशहरे मेले के दूसरे दिन भी रौनक बरकरार रही। रविवार को मेले का अंतिम दिन होगा। मेले के प्रमुख आकर्षण भरत मिलाप को संपन्न कराने की तैयारी रामलीला समिति द्वारा पूरी की जा चुकी है। इस मौके पर आकर्षक चौकियां निकाली जाएंगी। भरत मिलाप संपन्न कराने के लिए तहसील प्रशासन ने आधा दर्जन सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की है। स्टेट बैंक से रामदल, पट्टी चौक से भरत दल, रामराज इंटर कालेज के समीप से हनुमान दल, मेन रोड से शिवदल, बाईपास तिराहे से जय मां संतोषी दल तथा चमन चौक से कृष्णा दल निकलेंगे। मेले को सकुशल समपन्न कराने के लिए राम लीला समिति के अध्यक्ष जुग्गी लाल जायसवाल, सुरेश जायसवाल, अवधेश सिंह, डा. के एल विश्वकर्मा, राम चरित्र वर्मा, अशोक श्रीवास्तव समेत तमाम पदाधिकारी सहयोग करते नजर आए।

पट्टी रामलीला मैदान में लगा तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेला।- फोटो : PRATAPGARH

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