स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया से बचाव अभियान सिर्फ पोस्टरों और पंफलेट तक सीमित है। शहर से लेकर गांवों तक चौतरफा गंदगी का अंबार है। गंदगी और जगह-जगह पानी जमा होने से डेंगू और मलेरिया के मच्छरों ने दस्तक दे दी है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग अभी तक न तो फागिंग करा सका और न ही गांव में दवाओं का वितरण ही कराया गया। अब तक आधा दर्जन से अधिक मलेरिया के मरीज जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं और प्राइवेट अस्पतालों में भी दर्जनों मलेरिया के मरीजों का इलाज हो रहा है। गांव से लेकर शहर तक साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं हैं। हर ओर गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। बरसात होने से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इसके बाद भी जिला मलेरिया अधिकारी के साथ स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अभी चुप्पी साधे बैठे हैं। विभाग की दवा व फांगिग मशीन शोपीस बनकर रह गई है। अधिकारी महज पोस्टर और पंफलेट जगह-जगह लगवाकर लोगों को मलेरियां बुखार से बचने की जानकारी दे रहे हैं। जबकि सरकार इस काम के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च भी करती है।