ब्लड कैंसर से पीड़ित आनंद कुमार मिश्र की जिंदगी फिर से आम लोगों की तरह पटरी पर दौड़ने लगी है। ‘अमर उजाला’ की पहल पर मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रुपये मिलने के बाद उसका इलाज शुरू हुआ। अमेरिका से आई दवा के सेवन से उसकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ। अब न सिर्फ उसने काम शुरू कर दिया है बल्कि उसके घर की खुशियां भी लौट आई हैं। फीस के अभाव में छूटी उसकी तीनों बेटियों की पढ़ाई पहले ही शुरू हो चुकी है।
पट्टी इलाके के पूरेसनाथ गांव के आनंद कुमार मिश्र ब्लड कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी। इलाज में पत्नी के सारे जेवर, तीन विस्वा जमीन बिक गई। मकान गिरवी रखा हुआ था। माली हालत ठीक न होने की वजह से उनकी बेटी रश्मि, सारिका और निधि की फीस नहीं जमा हो पाई, जिससे उनकी पढ़ाई छूट गई। घर में खाने के भी लाले पड़ गए थे। ‘अमर उजाला’ ने 11 अगस्त के अंक में आनंद की बीमारी और उसकी परेशानी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। खबर का असर रहा कि डीआईओएस अगले दिन उसके घर पहुंचे और तीनों बेटियों का फिर से एडमिशन करवाया। तमाम सामाजिक संगठन भी उसकी मदद के लिए आगे आए। एलायंस इंटरनेशनल क्लब के अध्यक्ष रोशनलाल उमरवैश्य ने तीनों बेटियों को कापी-किताब की व्यवस्था की।
‘अमर उजाला’ की खबर का संज्ञान लेकर डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने आनंद के इलाज के लिए शासन को पत्र लिखा था। इस पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उसे इलाज के लिए चार लाख रुपये मिले। इस पर आनंद को किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ के प्रोफेसर एके त्रिपाठी के पास इलाज कराने पहुंच गए। दो महीने के इलाज के बाद 29 नवंबर को सीबीसी की जांच में उनकी डब्लूबीसी साढे़ छह लाख से घटकर 12 हजार पर आ गई है। प्रोफेसर एके त्रिपाठी ने बताया कि आनंद की स्थिति अब सामान्य हो गई है। उसकी एक दवा अमेरिका से मंगाई गई है। एक महीने बाद वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा।