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Pratapgarh News: सेहत को खतरा....खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा

Wed, 06 Sep 2023 09:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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राजा प्रताप बहादुर पार्क के बगल ​स्थित निजी अस्पताल द्वारा फेंका गया मेडिकल कचरा। संवाद
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सेहत को खतरा....खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर भले ही गंभीरता बरतने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। जिले के ज्यादातर नर्सिंग होम और पॉली क्लीनिक से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट( मेडिकल कचरा) को खुले में सामान्य कचरे में ही फेंका जा रहा है। रात के अंधेरे में चोरी-छिपे मेडिकल वेस्ट यहां-वहां डाल दिया जाता है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।
शहर के अंदर 30 से अधिक अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। इसके अलावा सौ से अधिक पॉली क्लीनिक संचालित हैं। शहर या कस्बों में मेडिकल वेस्ट निस्तारण के प्लांट नहीं लगे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण करने के लिए प्रयागराज की कंपनी को जिम्मा दिया गया है। बगैर बायोमेडिकल वेस्ट एनओसी के नर्सिंग होम और क्लीनिक के साथ पालीक्लीनिक के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण पर रोक लगा दी है।
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शहर से लेकर गांव तक के 68 ऐसे क्लीनिक को मिलाकर नर्सिंग होम संचालक हैं, जो बायोमेडिकल बेस्ट का अनापत्ति प्रमाणपत्र सीएमओ कार्यालय में नहीं जमा किए हैं। चोरी छिपे अपने अस्पताल का कचरा इधर, उधर फेंक रहे हैं। बायोमेडिकल बेस्ट उठाने वाली संस्था के मैनेजर अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि 10 बेड के अस्पताल का कचरा उठाने के लिए हम प्रतिमाह ढाई हजार रुपये लेते हैं। 10 से अधिक बेड वाले अस्पताल संचालकों से 180 रुपये प्रति बेड के दर से कचरा उठाने का शुल्क लिया जाता है।
वहीं अस्पताल, नर्सिंग होम संचालकों का दावा है कि वे एक निजी कंपनी के माध्यम से शहर का बायो मेडिकल वेस्ट रोजाना उठवाकर प्रयागराज भेजवा रहे हैं। मगर यह दावे हवा-हवाई हैं। शहर के कई इलाकों में खुले में मेडिकल कचरा फेंका जा रहा है। कबाड़ बीनने वालों के अलावा छुट्टा मवेशी मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आकर बीमार हैं।
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खूले में फेंका जा रहा अस्पताल का कचरा
एक नर्सिंग होम संचालक ने बातचीत के दौरान बताया कि बायोमेडिकल वेस्ट के साथ ही हमें हर महीने नगर पालिका को अस्पताल का कचरा उठाने के लिए शुल्क देना पड़ता है। सुबह नगर पालिका की टीम आती है और अस्पताल कचरा लेकर चली जाती है। वह कहा फेंका जा रहा है, यह मुझे भी नहीं पता है।

निदान अल्ट्रासाउंड के पीछे डंप है बायोमेडिकल वेस्ट
राजा प्रताप बहादुर पार्क के पास निदान अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन हो रहा है। इसके पीछे खाली जमीन है। प्रताप बहादुर पार्क के आसपास अनगिनत क्लीनिक, पाॅली क्लीनिक और दो नर्सिंग होम का संचालन हो रहा है। इस क्षेत्र से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को निदान अल्ट्रासाउंड सेंटर के पीछे चोरी छिपे फेंका जा रहा है। जो वहां दिनों दिन डंप होता जा रहा है। इसके अलावा कुछ लोग सई नदी किनारे दहिलामऊ के पास अस्पताल का कचरा फेंक रहे हैं।
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यह हैं मेडिकल बायो वेस्ट
प्रयोग की हुईं सिरिंज, यूज्ड बैंडेज, पैथोलॉजी वेस्ट, कैप्सूल, पीपीई किट, पीपीई कवर, मास्क, ग्लब्स आदि।
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मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आने से खतरा
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामेश पांडेय ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण न हो तो इससे संक्रमण हो सकता है। सामान्य कूड़े में या खुले में फेंक देने पर कबाड़ियों या आम आदमी को सिरिंज चुभने से संक्रामक बीमारी का खतरा हो सकता है। अस्पताल के एक बेड से निकलने वाला औसतन 250 ग्राम कूड़ा ऐसा होता है, जिसका निस्तारण हर हाल में जरूरी हैं। नहीं तो इसके अंदर मौजूद बैक्टीरिया या वायरस संक्रमण का कारण बनते हैं। खुले मैदानों या नालियों में फेंके जाने से वायु और जल प्रदूषण भी होता है। अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिनके पास बायोमेडिकल वेस्ट का एनओसी नहीं है, उनके पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सभी को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी मेडिकल वेस्ट उसे इकट्ठा करने के लिए रखी तीन तरह की पॉलिथीन में ही डालें। इससे मेडिकल बेस्ट उठाने वाली फर्म उसे लेजाकर नियमानुसार निस्तारण करेगी। खुले में मेडिकल वेस्ट डालने को लेकर सख्ती की जाएगी। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
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