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एटीएम जानते हैं पेटीएम नहीं

Mon, 26 Dec 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
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न्‍यूूज
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शहरों से दूर गांवों में खेतों में काम करने वाले किसान और गंवई मंडियों के छोटे दुकानदारों के साथ ग्राहकों की जिंदगी भी कैश के सहारे ही चल रही है। उन्हें न कैशलेस के बारे में जानकारी है न कैशलेस भुगतना करना चाहते हैं। रविवार को अमर उजाला ने कई गांवों के किसानों और मंडियों का जायजा लिया तो अधिकांश लोगों ने कैशलेस पेमेंट के बारे में जानकारी न होने की बात कही। किसानों ने कहा, एटीएम तो जानते हैं, लेकिन पेटीएम नहीं।
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कैशलेस के लिए जेब में होना चाहिए एंड्राइड फोन
साढ़े तीन बजे झींगुर बाजार स्थित किराने की दुकान पर बैठे सोमदत्त से कैशलेस के बारे में बात की गई तो उसने बताया कि यह संभव ही नहीं है। तर्क दिया कि कैशलेस जैसी व्यवस्था शहरों के लिए ही ठीक है। इसके लिए गांव के लोगों को पहले अपने खाते में खूब पैसे जमा करने होंगे। खाते में पैसा होगा तभी एटीएम और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन किया जा सकेगा और गांव के आदमी के पास पैसा कहां है। दुकान पर सामान खरीद रहे बिहार के चंदन का कहना था कि पेटीएम और अन्य एप्स के लिए इंटरनेट भी डलवाना पड़ेगा। कितना पैसा लोग खर्च कर पाएंगे।

कैसे मिलेगा उधार
करीब तीन बजे हथिगवां के किलहनापुर गड़रियान गांव में खेत में घूमते कंधईलाल मिल गए। उनसे बात की गई तो कहा, सीधे खाते से खरीदा जाएगा तो उन्हें छह महीने का उधार कैसे मिलेगा। अगर हमारे खाते में पैसा नहीं होगा तो उधार दुकानदार नहीं देगा। ऐसे तो बहाना होता है कि खाते से निकालकर पैसा देंगे। बावजूद इसके उसने बताया कि हम मोबाइल में पैसा भरवाने के लिए दुकानदार पर ही आश्रित होते हैं। ऐसे में इस तरह की व्यवस्था में तो दुकानदार पता नहीं कितना पैसा ले लेगा।
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ब्रिकी हो नही रही, कैसे होगा कैशलेस
करीब साढ़े तीन बजे महेशगंज निवासी हरिश्चंद्र अपनी सब्जी की दुकान पर बैठे मिले। कैशलेस के बारे में पूछने पर बताया कि नकदी नहीं होने के कारण 2000 की जगह पर 200 रुपये की सब्जी बेच पाया हूं। शाम होती जा रही है। अब 200 रुपये सामान का निकालूं या फिर घर में दाल रोटी के लिए। पैसे नहीं होंगे तो कितना कैशलेस होगा। खाते में पैसा भी होना चाहिए। घर में रखने के लिए तो पैसे हैं नहीं खाते में कितना रखा जाएगा। पेटीएम सहित अन्य एप्स के बारे में पूछने पर बताया कि टीवी पर प्रचार होता है, लेकिन हमारे पर इतना बड़ा फोन कैसे आएगा।    

ये पेटीएम क्या है?
दोपहर के ढाई बजे हथिगवां के ही मलाका रजाकपुर गांव में बृजलाल प्रजापति आलू के खेत में निराई कर रहे थे। कैशलेस लेन-देन के बारे में बात की गई तो कहा, यह कैसे संभव है? बताया कि उनका खाता बैंक आफ बड़ौदा में है। पेटीएम जैसे एप्स के बारे में पूछने पर कहा कि वह एटीएम के बारे में जानते हैं, पेटीएम क्या है?

मालिक जैसे चहिहैं वैसे होई
दोहपर बाद करीब तीन बजे हथिगवां के किलहनापुर गड़रियान गांव निवासी विंदेश्वरी खेत में मिल गए। जब उन्हें कैशलेस के बारे में समझाकर पूछा गया तो उनका कहना था कि यह कैसे होगा। बाद में फिर उन्हें इसके बारे में समझाने का प्रयास किया गया तो कहा, जैसा मालिक चहिहैं वैसेन होई। कहा, अभी तक तो पैसे देकर ही सामान की खरीदारी करते हैं। कभी-कभार दुकान से उधार भी मिल जाता है। फिलहाल कैशलेस लेनदेन के बारे में जानकारी नहीं है।
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