प्रयागराज में आयोजित इंदिरा मैराथन में कुंडा के बहादुरपुर निवासी ज्ञानबाबू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ज्ञानबाबू की जीत से क्षेत्र में खुशी की लहर है। ज्ञानबाबू का बचपन से ही एथलेटिक्स के प्रति जुनून रहा।
ज्ञानबाबू ने बताया कि उन्होंने बीच में ही बीटेक की पढ़ाई छोड़ दी। इंदिरा मैराथन में कॅरिअर बनाने के संकल्प लिया। आखिरकार बुधवार को सफलता का परचम लहराया। ज्ञानबाबू ने बताया कि वह इंजीनियरिंग बीच में ही छोड़ पूरी तरह प्रोफेशनल प्रशिक्षण में जुट गए। सीमित संसाधनों में उनकी मेहनत और संघर्ष का परिणाम है कि आज वे राष्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान बना सके हैं।
बीते छह वर्षों में वे देश की कई प्रतिष्ठित मैराथनों में भाग ले चुके हैं, जिनमें कोल इंडिया मैराथन रांची, पुणे इंटरनेशनल मैराथन, बीएसएफ मैराथन चंडीगढ़, अडाणी मैराथन अहमदाबाद शामिल है। पिछले महीने लखनऊ मैराथन में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल कर पहले ही अपनी दावेदारी दर्ज करा दी थी।
अब ज्ञानबाबू का लक्ष्य और बड़ा है। वे फरवरी 2026 में होने वाली एशियन क्वालिफायर प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे हैं। उनका कहना है कि यह उनके कॅरिअर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ होगा और इसके लिए वे रोज कठोर प्रशिक्षण ले रहे हैं।
ज्ञानबाबू के पिता लल्लू लाल पेशे से राजमिस्त्री और मां कौशल्या देवी गृहणी हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर बेहद गर्वित हैं। चार भाइयों में तीसरे नंबर पर आने वाले ज्ञानबाबू ने अपने अथक प्रयासों और जुनून से क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।