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गुरु पूर्णिमा: सांईनाथधाम में सोशलडिस्टेंसिंग के बीच हुआ दर्शन-पूजन

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गुरु पूर्णिमा: सांईनाथधाम में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच हुआ दर्शन-पूजन
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महाआरती संग सांईनाथ का गुणगान, श्रद्धालुओं में बांटा गया प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शहर के बलीपुर स्थित श्रीसांईनाथ धाम में गुरुपूर्णिमा का पर्व साईनाथ संस्थान द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के बीच मनाया गया। श्रद्धालुओं ने श्रीसांईनाथ का विधि- विधान से पूजन अर्चन कर प्रसाद वितरण किया। इस दौरान भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा।
श्रीसांईनाथ संस्थान के अध्यक्ष शैलेंद्रनाथ मिश्र, समाजसेवी रोशन लाल ऊमरवैश्य ने पूजन-अर्चन कर सांईनाथ की आरती उतारी। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। अध्यक्ष शैलेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि गुरु िपूर्णिमा के पर्व को लेकर संस्थान द्वारा तीन दिवसीय कार्यक्रम होता था, मगर कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते यह स्थगित कर दिया गया। समाजसेवी रोशनलाल ऊमरवैश्य ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व जीवन में गुरु की महत्ता के मायने बताता है। व्यक्ति की सफलता में गुरु का बहुत बड़ा स्थान होता है। हम सभी को गुरुओं का आदर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि जल्द ही कोरोना वायरस से हम सभी को निजात दिलाएं, ताकि पर्व, उत्सव व त्योहार को पारंपरिक तरीके से मनाया जा सके। इस अवसर पर छोटू, विवेक, आरडी पांडेय आदि मौजूद रहे।
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बौद्ध बिहार में मनाया गया धम्म प्रवर्तन चक्र दिवस
प्रतापगढ़। समन्वय सेवा संस्थान द्वारा आषाण पूर्णिमा पर चिलबिला स्थित बौद्ध बिहार में रविवार को धम्म प्रवर्तन चक्र दिवस मनाया गया। इस अवसर पर भिक्षु संघ पूज्य भंते कल्याण व भंते धम्मदीप द्वारा बुद्ध वंदना, त्रिशरण, पंचशील एवं धम्म देशना व ध्यान साधना सहित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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बौद्ध धर्म जानककार डा. दयाराम मौर्य ने कहा कि आषाण पूर्णिमा के दिन ही राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने 29 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन का त्याग किया था। आषाण पूर्णिमा को धम्म प्रवर्तन चक्र दिवस का नाम से जाना जाता है। पुरातत्व विशेषज्ञ डा. पीयूषकांत शर्मा ने कहा कि बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा से वर्षावास प्रारंभ होता है और आश्विन की पूर्णिमा को समाप्त होता है। इसलिए इसे आतुर्मास भी कहते हैं। संचालन शिक्षाविद राकेश कन्नौजिया ने किया। इस अवसर पर उमेश कन्नोजिया, सुरेंद्र विमल, राम जी उमरवैश्य, हीरालाल, सुनीता, प्रभात कुमार, मोहन, डाली, काजल आदि मौजूद रहीं।
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