छठ महापर्व के अंतिम दिन रविवार को उदयाचलगामी सूर्य के दर्शन के लिए बेल्हा देवी घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का उपवास प्रसाद ग्रहण कर समाप्त किया। घाट पर छठ गीत से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत 31 अक्तूबर गुरुवार को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय से हुई थी। 1 नवंबर शुक्रवार को पंचमी को महिलाओं ने खरना किया। उसके बाद कृष्ण पक्ष की षष्ठी 2 नवंबर अक्टूबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। शाम को विधि विधान से पूजन अर्चन कर व्रती महिलाओं ने मंगलकामना के लिए घर में कोसिया भरकर छठगीत गाए।
वहीं छठ महापर्व के अंतिम दिन कृष्ण पक्ष की सप्तमी 3 नवंबर की सुबह भक्तों का रेला बेल्हा देवी घाट सहित जिले के अन्य घाटों पर उमड़ पड़ा। घर से ढोल, नगाड़े की धुन पर छठ माता के भक्त थिरकते हुए घाट तक सिर पर प्रसाद वाला दउरा व कंधे पर गन्ना लेकर पहुंचे। उसके बाद छठव्रतियों ने नदी से बालू निकाल कर पूजा के लिए बेदी बनाई गई। दीपक से सजावट कर दउरा रखा गया। साथ ही गमछा लिपटा गन्ना नदी घाट के किनारे लगाया गया।
इसके बाद वगती महिलाएं नदी में स्नान कर प्रसाद वाले दउरे, डलिया, सूप को लेकर भगवान भास्कर के निकलने का इंतजार करने लगे। व्रती महिलाओं ने भगवान से उगने की प्रार्थना करते हुए केलवा के पात पर उगेलन सूरूज देवा सहित तमाम गीत गुनगुनाए। भगवान भाष्कर के उदय होते ही व्रती महिलाओं ने चेहरे खिल गए। सभी जोर-जोर से छठ माता और सूर्य के जयकारे लगाने लगे।
उगते सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य देकर मंगल कामना की। विधि विधान से पूजन अर्चन करने के बाद हवन किया गया। उसके बाद भगवान भास्कर और छठ माता से मंगल आशीष मांग छठव्रतियों ने अपने 36 घंटे का उपवास ठेकुआ खाकर समाप्त किया।
घाट तक लेटते हुए गई महिलाएं
मन्नत पूरी होने पर बेल्हा देवी मंदिर परिसर से घाट तक लेटते हुए महिलाएं घाट पर पहुंची। उनकी आस्था व भक्ति देख घाट परिसर पर जयकारे गूंजने लगे। घाट से लेकर मंदिर परिसर तक भक्ति और आस्था का विहंगम नजारा दिखा।
छठ पूजा समिति ने लगाए प्रसाद स्टाल
छठ महापर्व के अंतिम दिन रविवार की सुबह भक्तों को प्रसाद वितरित करने के लिए छठ पूजा समिति ने स्टाल लगाए। मंदिर परिसर में मौजूद सभी भक्तों को प्रसाद दिया गया। वहीं व्रतियों को समिति की ओर से प्लेट बांटे गए।
झांकी मंचन के बीच जगराते में गूंजे छठ माता के गीत
मंदिर परिसर छठ महापर्व को लेकर चल रहे जगराते में भोर से ही गायकों ने छठ माता के गीत गाकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। झांकी मंचन के बीच छठ माता के गीत से भक्ति भावना हिलोरे मार रही थी। मंदिर परिसर में की गई सजावट लोगों को आकर्षित कर रही थी।
डाला छठ पर बेल्हा देवी धाम में आयोजित भगवती जागरण में झांकी प्रस्तुत करते कलाकार।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर उदयाचल सूर्य की उपासना करती श्रद्धालु।- फोटो : PRATAPGARH
बेल्हा देवी धाम सई नदी में उदयाचल सूर्य को अर्घ देती महिलाएं।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर उदयाचल सूर्य की स्तुति करती श्रद्धालु।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर सूर्योदय पर अर्घ देती महिला।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर सूर्य देव की आराधना करती श्रद्धालु।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर मां बेल्हा देवी धाम सई नदी किनारे सूर्योदय के इंतजार में खड़े श्रद्धालु।- फोटो : PRATAPGARH
डाला छठ पर मां बेल्हा देवी धाम में सई नदी किनारे छठ मैया की पूजा करती श्रद्धालु।- फोटो : PRATAPGARH