जिले के अतिकुपोषित बच्चों को खोजने में ग्राम प्रधानों का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके लिए 11 अप्रैल से सभी ब्लाकों में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। बीते सात माह में 9092 अतिकुपोषित बच्चों की सेहत सुधार किया गया है। राज्य पोषण मिशन योजना के तहत जिले के अतिकुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास एवं महिला कल्याण विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इस दिशा में उम्मीद से अधिक सफलता मिल रही है। बीते सितंबर माह में जिले में हुए सर्वे में 26,780 अतिकुषोषित बच्चे मिले।
शून्य से पांच वर्ष के इन बच्चों को पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल के लिए दोनों विभागों के मिलकर अभियान चलाने से 9092 बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। जिला अस्पताल में खुले स्वास्थ्य परीक्षण पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिए लगभग 2536 बच्चों को भर्ती कराकर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की गई। योजना को प्रभावी बनाने और कुपोषण के शिकार अधिकाधिक बच्चों को लाभान्वित करने के लिए अब प्रधानों का सहयोग लिया जाएगा। 11 अप्रैल से जिले के 17 ब्लाकों में होने वाले प्रशिक्षण में योजना की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के साथ ही गांव के अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करने में सहयोग लिया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुपोषण के प्रति अभिभावकों में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रधानों को जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग के जानकर लोग उनकी सभी समस्याओं का निराकरण भी करेंगे।