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11 साल बाद भी पहले जैसे हालात, और गहरा सकता है पेयजल संकट

Fri, 12 Jan 2018 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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भूजल बचाने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लोगों को जागरूक करने के लिए लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं। जल संरक्षण के तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन इस मुहिम को झटका लगा है। जिले में 11 साल पहले 13 ब्लाकों को जलस्तर घटने के कारण डेंजर जोन घोषित कर दिया गया था। अब भी वहां हालात वैसे ही हैं। इन इलाकों में अब नलकूप कनेक्शन की छूट दे दी गई है। तर्क है कि इस इलाके के किसानों को डीजल पंपिंगसेट से सिंचाई महंगी पड़ रही है।
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जिले के आसपुरदेवसरा, गौरा, लक्ष्मणपुर, लालगंज, मान्धाता, मंगरौरा, पट्टी, सदर, रामपुर संग्रामगढ़, संडवा चंद्रिका, शिवगढ़, बेलखरनाथधाम आदि ब्लाकों में फसलों की सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करने वाले किसानों को सरकार के फैसले से राहत जरूर मिली है, लेकिन जल संरक्षण के लिए खतरा भी पैदा हो गया है। इन ब्लाकों में 11 साल पहले ही जलस्तर 25 से 35 फिट नीचे चला गया था। तब डीजल पंपिंगसेट काम करना बंद कर दिए थे। अब सिंचाई के लिए भी लोगों को बोरिंग गहरी करानी पड़ रही है। किसान 120 से 150 फिट तक बोरिंग कराकर सबमर्सिबल पंप से किसी तरह पानी निकाल रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया गया था कि इन इलाकों में और नलकूप लगाए गए तो भविष्य में मुसीबत खड़ी हो सकती है। इसके आधार पर नलकूपों को बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा दी गई। डेंजर जोन घोषित 13 ब्लाकों में बीते 11 वर्षों के दौरान जल संरक्षण के लिए कोई विशेष उपाय नहीं किए गए। बताया जाता है कि शासन की मनाही के बाद भी चोरी-छिपे बोरिंग होती रही। इससे अब भी हालात जस के तस हैं। अब शासन के फैसले के बाद तेजी से नलकूप लगवाए जाएंगे, जिससे भविष्य में यहां जलस्तर और नीचे जा सकता है। बारिश भी जिले में कुछ वर्षों से जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रही हैॅ। बीते वर्ष की ही बात करें तो औसतन 1100 मिमी बरसात होनी चाहिए थी, लेकिन जनवरी से दिसंबर तक मात्र 668.00 मिमी ही बरसात हुई है।
नहरों ने उम्मीद पर फेरा पानी 
पट्टी, मंगरौरा, लालगंज, रामपुर संग्रामगढ़, गौरा, शिवगढ़ और आसपुरदेवसरा ब्लाकों में नहरों का जाल बिछा हुआ है। इसके बावजूद जलस्तर नीचे खिसकता जा रहा है। दरअसल में इन नहरों में टेल तक पानी पहुंचता ही नहीं है। सिंचाई विभाग कागज पर खेतों की सिंचाई कर देता है। 
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फसलों की सिंचाई आसान 
पंपिंग सेट फेल होने के बाद किसान सबमर्सिबल पंप से सिंचाई करते थे। इससे  62.37 रुपये की दर से डीजल खरीदना पड़ता था। मगर अब बिजली का कनेक्शन मिलने से अब सस्ते दर पर फसलों की सिंचाई होगी। 
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