लोहा काटने...कार व मोटर बनाने...घरों की वायरिंग... एसी , फ्रिज और टीवी दुरुस्त करने का काम भी अब युवतियां करेंगी। हर क्षेत्र में झंडा फहरा रहीं आधी आबादी में इन कार्यों को करने का जज्बा दिख रहा है। आईटीआई में इसके लिए वह प्रवेश लेकर प्रशिक्षण और पढ़ाई कर रही हैं। यह स्थितियां महिला सशक्तीकरण और उनके हौसले की उड़ान का अनोखा आगाज है।
आईटीआई में प्रवेश लेकर इन कार्यों को करने के लिए कई युवतियां पढ़ाई व ट्रेनिंग कर रही हैं। ग्रेडवार दाखिले पर गौर करें तो फिटर में आठ और टर्नर यानी लोहा कटिंग में पांच युवती ने प्रवेश लिया है। मशीनिस्ट में तीन और इलेक्ट्रीशियन की पढ़ाई सात बेटियां हौसले और लगन के साथ कर रही हैं। इसी तरह टेलीवीजन, फ्रिज, एसी बनाने के लिए भी लड़कियां हर दिन प्रशिक्षण ले रहीं हैं। कुछ कोर्स एक वर्षीय हैं तो कुछ दो साल के हैं। इसके अलावा कार, ट्रैक्टर, ट्रक, बस व चारपहिया व छोटे वाहनों की मरम्मत के लिए भी लड़कियों ने प्रवेश लिया है। वे बराबर लगन के साथ काम करतीं हैं और पढ़ाई भी कर रही हैं। इन ग्रेडों में दो-तीन युवतियों ने प्रवेश लिया है। नलों की टोटियां बनाने के जज्बे का बीज भी इनमें अंकुरित होने लगा है। पलंबर ग्रेड से आईटीआई में एक युवती पढ़ाई कर रही है। कटिंग टेलरिंग में 16 और इम्ब्राइडरी यानी कढ़ाई में पांच बेटियां हाथ आजमाने की जुगत में हैं।
मतलब साफ है कि अब बेटियां लड़कों की तरह घरों की वायरिंग और पंखा व विद्युत मोटर आदि बनाने का काम करेंगी। यह महिला सशक्तीकरण और हर क्षेत्र में बढ़ते इनके कदम की अनोखी पहल है। बेटियों को बेटों से कमजोर समझने वालों की सोच पर यह युवतियां करारा प्रहार कर रही हैं। लड़के और लड़कियों में असमानता की ढहती यह
दीवार अब लोगों को समझने की जरूरत है।