सांगीपुर स्थित पौराणिक धार्मिक स्थली बाबा घुइसरनाथ धाम व भैरवन धाम के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग खजाना खोल दिया है। इन धार्मिक स्थलों का तीन करोड़ चार लाख रुपये के खर्च से सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
विधायक अराधना मिश्रा मोना और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के प्रस्ताव पर इसकी मंजूरी मिली है। बजट भी जारी कर दिया गया है। क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं ने इस कार्य के स्वीकृत होने पर प्रसन्नता जताई है।
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी एवं क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना के प्रयास से बाबा घुइसरनाथ धाम में पर्यटन विकास की कई परियोजनाएं संचालित हैं। यहां सई तट पर लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर कराया जा रहा कार्य प्रगति पर है। इस कार्य के लिए दो करोड़ चार लाख रुपये का बजट मंजूर हो चुका है।
पहली किस्त के रूप में चालीस लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। पहली जनवरी को शासन के अनुसचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव की ओर से इस बावत शासनादेश भी जारी कर दिया गया।
इसी तरह रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र में प्राचीन शिव मंदिर भैरवन बाबा धाम के सौंदर्यीकरण की मंजूरी शासन से मिली है। इसके तहत पर्यटन विभाग के उपनिदेशक दिनेश कुमार ने एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत करते हुए प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव पहुंचते ही शासन की ओर से धनराशि अवमुक्त की जाएगी।
बाबा घुइसरनाथ धाम तथा भैरवन बाबा में पर्यटन विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत होने पर श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता जताई है।
बाबा घुइसरनाथ धाम का मंदिर सई नदी किनारे स्थित है। प्राचीन काल में यहां घुइसर यादव जानवर चराने जाते थे। उनकी ईश्वर के प्रति आस्था नहीं के बराबर थी। यहां एक पत्थर के टीले से अटक कर वह गिर गया तो उसी पत्थर पर लाठी मारने लगा। वह लाठी से जितने वार करता पत्थर उतना ही ऊपर निकल आता था।
उसके बाद से घुइसर यादव दिन रात उसी पथ्थर की सेवा करने लगा। उसकी सेवा भाव से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसके सारे कष्टों को दूर किया। मान्यता यह भी है कि भगवान राम वन जाते समय इधर से निकले तो उनके पसीने की एक बूंद यहां गिरी थी और यहां करील वृक्ष उत्पन्न हुआ। यह करील वृक्ष आज भी आस्था का केंद्र बना है।
सांगीपुर के भैरवन बाबा मंदिर का प्रसंग शिव के तांडव से जुड़ा है। मान्यता है कि एक बार द्राक्षत नाम का राक्षस आया और यहां का पुष्प उठा ले गया। भगवान भोलेनाथ को यह पता चला तो उनके तांडव से धरती हिलने लगी। भगवान शिव के तांडव से भयभीत राक्षस ने वह फूल अपनी मां के पेट में छिपा दिया। बताते हैं कि भगवान ने पुष्प निकालकर मंदिर लाए, जो आज भी बचकुन नाम के पेड़ के रूप में है। यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां हर वर्ष तीन दिनी मेला भी लगता है। जहां दूर दराज से दुकानदार दो किलोमीटर क्षेत्र में अपनी दुकानें लगाने पहुंचते हैं। भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
बाबा घुइसरनाथ शिवलिंग।
बाबा घुइसरनाथ शिवलिंग।
बाबा घुइसरनाथ शिवलिंग।