कभी बच्चों के पॉकेट खर्च से शुरू हुआ गणेश पूजा उत्सव आज शहर में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। श्याम बिहारी गली में वर्ष 2009 में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने बचाए हुए पैसों से गणेश पूजा की शुरुआत की थी। अब यही आयोजन बेल्हा के राजा के नाम से पहचान बना चुका है।
हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर गणपति के दर्शन करते हैं। इस बार भी गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। महाराष्ट्र से करीब 60 हजार रुपये की गणेश प्रतिमा मंगाई गई है। 14 सितंबर से शुरू होने वाला महोत्सव सात दिनों तक चलेगा। आयोजन को भव्य बनाने के लिए पूजा पंडाल को सजाने के साथ अन्य तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।
आयोजन समिति के प्रह्लाद खंडेलवाल ने बताया कि महोत्सव के दौरान भक्ति संध्या, महाआरती, गरबा उत्सव, बाल उत्सव, विशाल भंडारा और शोभायात्रा समेत कई कार्यक्रम होंगे। 2009 में रौनक, कुनाल, हर्षित, पवन, राजा, श्रेयांश, अंशू और रोहित समेत कुछ बच्चों ने अपने पॉकेट खर्च से गणेश पूजा शुरू की थी। तब न साधन थे, न बड़ा पंडाल लेकिन गणपति के प्रति आस्था और कुछ करने का जुनून था।
बच्चों की वही छोटी-सी पहल धीरे-धीरे परंपरा बन गई। आज जब भव्य पंडाल सजता है और हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो आयोजन से जुड़े पुराने साथियों को अपने बचपन के वे दिन याद आ जाते हैं। उनके लिए यह उत्सव सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि बचपन की यादों और आस्था से जुड़ी भावनाओं का पर्व है।