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महाविद्यालयों में खेल के नाम पर चल रहा 'खेल'

Mon, 17 Oct 2016 11:44 PM IST
प्रतापगढ़
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खेल प्रतियोगिता में दौड़ते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
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जिले के महाविद्यालयों में खेलकूद भले न होता हो, लेकिन कालेज प्रशासन बराबर क्रीड़ा शुल्क वसूल रहा है। ज्यादातर कालेजों के पास न तो मैदान और नहीं प्रशिक्षक। इसके बाद भी छात्र-छात्राओं से नियमित शुल्क वसूली कर गोलमाल किया जा रहा है।
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शासन व विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कालेज परिसर में खेल का मैदान होना चाहिए। जिससे कालेज में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देकर कई तरह के खेलों में निपुण बनाया जा सके। जिससे वह पढ़ाई के साथ-साथ इस क्षेत्र में भी अपने कैरियर की तलाश कर सकें।

बता दें कि तमाम सरकारी नौकरियां स्पोर्ट कोटे से ही छात्र-छात्राओं के लिए निकाली जाती हैं। उसमें सिर्फ खिलाड़ियों का ही सेलेक्शन किया जाता है। ऐसे में शासन ने प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को खेल के प्रशिक्षण को दिए जाने की व्यवस्था कर दी है। जिससे छात्र-छात्राएं कालेज स्तर पर अपने चयनित खेलों में निपुण हो सके। ऐसे में वह बढ़ती उम्र के साथ खेल की बारिकियों के साथ उसमें कुशल हो जाते हैं। इन सबके बावजूद जिले के महाविद्यालयों में शासन के नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है। जिले में चार राजकीय कालेज एवं 7 अनुदानित कालेज समेत कुल 102 महाविद्यालय हैं। इनमें से कुछ गिने चुने महाविद्यालयों में ही खेल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जहां प्रशिक्षण दिया भी जा रहा है, उनमें से तमाम कालेजों में खेल के मैदान भी नहीं हैं। जहां मैदान भी हैं वहां पर खेती की जा रही है। इसके बावजूद सभी महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय के नियम का हवाला देकर 50 रुपये क्रीड़ा शुल्क वसूला जा रहा है। जिसमें 15 रुपये विश्वविद्यालय का अंश होता है व शेष कालेज का। ऐसे में छात्र-छात्राओं से खेल के मद के नाम पर वसूला जा रहे लाखों रुपये का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। बल्कि इसे महाविद्यालय हजम करने में लगे हुए हैं। साथ ही क्रीड़ा शुल्क पैसा वसूल रहे तमाम कालेजों के पास न ही खेल ग्राउंड और न ही प्रशिक्षक।

जिले के रानीगंज व ढिढुई राजकीय महाविद्यालय व एमडीपीजी व एमएमपीजी कालाकांकर को छोड़ दिया जाए तो किसी भी कालेज में प्रशिक्षक नहीं है। वहीं एमडीपीजी कालेज में खेल प्रशिक्षक तो हैं लेकिन खेल का मैदान नहीं है। ऐसे में वहां के छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण स्पोर्ट स्टेडियम में दिया जाता है। जिसकी जांच विश्वविद्यालय प्रशासन भी नहीं कर रहा है। ऐसे में जहां एक तरफ छात्र-छात्राओं का आर्थिक रुप से शोषण किया जा रहा है। वहीं उनके भविष्य के साथ भी खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

कालेज प्रशासन द्वारा खेल को लेकर की जा रही लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे सभी कालेजों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करेगा। जो खेल मद के पैसे का गलत उपयोग कर रहे हैं। साथ ही छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण नहीं दे रहे हैं। खेल के मैदान के गलत उपयोग किए जाने की भी जांच की जाएगी।
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डॉ. एसएन शुक्ला, मीडिया प्रभारी, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि फैजाबाद
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