विकास भवन में अधिवक्ताओं से मारपीट के मामले में वारंट जारी होने से आक्रोशित कर्मचारियों ने शुक्रवार को कार्य बहिष्कार कर मेनगेट पर ताला लगा दिया। आक्रोशित कर्मचारियों ने किसी भी अधिकारी को अंदर नहीं घुसने दिया। पुलिस द्वारा शोषण का आरोप लगाया।
खबर मिलने पर प्रभारी सीडीओ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं था। कर्मचारियों ने कचहरी में अलग स्थान पर कैंप लगाकर जमानत की कार्रवाई करने व मुकदमे को स्पंज कराए जाने की मांग की। डीएम से वार्ता के बाद करीब चार बजे कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ।
वर्ष 2013 में विकास भवन में अधिवक्ताओं और विकास भवन के कर्मचारियों के बीच मारपीट हुई थी। इस मामले में दोनो पक्षों से मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में विकास भवन के 45 कर्मचारी नामजद हुए थे। घटना को लेकर अब 45 कर्मचारियों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है।
वारंट को लेकर पुलिस ने एक कर्मचारी को हिरासत में ले लिया। इसकी जानकारी होते ही कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। शुक्रवार को उन्होंने मेन गेट पर ताला लगाकर प्रशासन के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। कर्मचारियों ने किसी भी अधिकारी को अंदर नहीं घुसने दिया। कहा कि मामले में किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एकपक्षीय कार्रवाई की गई है। मुकदमा स्पंज किया जाए और जमानत कचहरी के बजाए अलग स्थान पर कैंप बनाकर कराई जाए।
ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ कोई अभद्रता न हो सके। करीब 12 बजे प्रभारी सीडीओ मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। मगर उनकी एक न सुनी गई। कर्मचारी डीएम से वार्ता करने को लेकर अड़े रहे। करीब तीन बजे डीएम से उनकी बात हुई। पदाधिकारियों ने पूरे मामले से डीएम को अवगत कराया। डीएम ने दो दिन का समय मांगा है। इसके बाद जाकर कर्मचारी शांत हुए। ऐसे में पूरे दिन विकास भवन का कार्य ठप रहा। इस अवसर पर मिथिलेश कुमार, शकील अहमद, राकेश सरोज, श्रीनारायण मिश्र, संजय यादव, अजय श्रीवास्तव, श्याम देवी आदि मौजूद रहीं।