शहर और ग्रामीण इलाकों में छह सप्ताह से सैलून की दुकानें बंद हैं। इससे शहर के लोग जहांदाढ़ी, बाल नहीं बनवा पा रहे हैं, वहीं सैलून में काम करने वाले कारीगरों की जीविका पर सकंट गहरा गया है। सैलून कारोबारियों को एक-एक हजार रुपये तो मिले, मगर इन रुपये से उनकी घर की गृहस्थी नहीं चल पा रही है।
लॉकडाउन के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों के सैलून की दुकानों में छह सप्ताह से ताला लटक रहा है। शहर के लोग जहां दाढ़ी और बाल नहीं कटवा पा रहे हैं, वहीं सैलून में काम करने वाले लगभग 12,000 कारीगरों के सामने जीविका चलाने का संकट गहरा गया है। लॉकडाउन के तीसरे चरण में दुकानें खुलने की प्रतीक्षा करने वाले दुकानदारों को भी झटका लगा है। प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक सैलून की दुकानें खुलने का कोई आदेश नहीं जारी होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।
शहर में किराए का कमरा लेकर रहने वाले कारीगरों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शासन की पहल पर एक-एक हजार रुपये खाते में आए, मगर एक हजार रुपये में एक माह बिताना भारी पड़ रहा है। राशन, सब्जी, दूध और गैस खरीदना भारी पड़ रहा है। शहर में लगातार पुलिस की गश्त जारी रहने से चोरी-छिपे भी दुकानें नहीं खुल पा रही हैं। इससे कमाई पर पूरी तरह बट्टा लग गया है।
शहर और ग्रामीण इलाकों में जो लोग नाई को घर बुलाते हैं। उन्हें दोगुनी रकम चुकता करनी पड़ रही है। अधिक रुपये के भुगतान से चिंतित लोगों ने नाई को बुलाना भी बंद कर दिया है।
लॉकडाउन के चलते लगभग डेढ़ महीने से शहर के ब्यूटी पार्लर पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में महिलाओं को भी अपने बाल सेट कराने के लिए राहत मिलने का इंतजार है। मगर लॉकडाउन के तीसरे चरण में भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। ब्यूटी पार्लर बंद होने से महिला कारीगरों का भारी नुकसान हो रहा है।