शहर में आंबेडकर चौराहे से मीराभवन तक नाला और फुटपाथ का निर्माण चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस काम के लिए 1.69 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। जिसमें 99.88 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। नगर पालिका अपने हिस्से की 40 फीसदी धनराशि नहीं दे रही, जिससे काम अटक गया है।
शहर के विकास के लिए शासन से पिछड़ा क्षेत्र अनुदान के तहत नगर पालिका को 99.88 लाख रुपये मिले थे। इस योजना के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों पर शासन से मिली धनराशि के अलावा 40 फीसदी धनराशि नगर पालिका को भी खर्च करनी थी। आंबेडकर चौराहे से मीराभवन चौराहे तक फुटपाथ व नाला निर्माण के लिए नगर पालिका ने इस्टीमेट बनाकर वर्ष 2017-18 में 1.69 करोड़ रुपये की निविदा निकाली। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काफी समय तक काम लटकाए रखा गया।
चार साल बाद भी बीआरजीएफ से मिला 99.88 लाख रुपये का बजट खर्च करने के बाद भी फुटपाथ व नाला निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका। नगर पालिका द्वारा अभी तक अपने हिस्से की धनराशि अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए जारी नहीं की गई है। इससे सिविल लाइन, करनपुर, दहिलामऊ दक्षिणी और मीराभवन के नागरिकों को अभी भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या से इन मोहल्लों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
पिछड़ा क्षेत्र अनुदान से नाला व फुटपाथ का निर्माण कराने के लिए टेंडर निकाला गया था। विवादों की वजह से निर्माण कार्य में विलंब होता गया। कोरोना काल में नगर पालिका का बजट कम हो गया। अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए बजट की मांग की गई है।
- मुदित सिंह, ईओ, नगर पालिका