जब महिला जनप्रतिनिधि ही अपने अधिकार को लेकर जागरूक नहीं हैं तो आम महिलाओं की बात क्या की जाए। नगर पंचायत सिटी के वार्ड एक दरवाजा बाहर की पार्षद राबिया खातून जनता के जरिए सौंपी गई जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही हैं। बोर्ड की बैठक को छोड़ बाकी नगर पंचायत से वार्ड तक का काम उनके पति रुस्तम अली उर्फ नन्हें ही देखते हैं। खुद पार्षद जीत के बाद घर से बाहर आज तक नहीं निकलीं। ऐसे में वार्ड के लोग उनके पति रुस्तम अली को ही पार्षद के रूप में जानते व पहचानते हैं।
शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे अमर उजाला टीम उनके घर पहुंची तो दरवाजे पर रुस्तम अली से मुलाकात हुई। उन्होंने आव देखा न ताव, अमर उजाला का नाम सुनते ही वार्ड में हुए विकास कार्यों की गिनती करानी शुरू कर दी। पार्षद को बुलाने की बात कही गई तो वह टरकाने लगे। हालांकि किसी तरह करीब आधे घंटे बाद उनके निर्देश पर पार्षद राबिया घर से बाहर निकलीं। राबिया खातून ने वार्ड का नाम तो बताया पर जिस वार्ड से वह चुनाव जीती हैं वहां के वोटरों की संख्या पूछने पर चुप्पी साध लीं।
उनसे जब यह पूछा गया कि वार्ड के लोग तो आप को पार्षद जानते ही नहीं तो उनका जवाब था कि वह चुनाव में लोगों से वोट मांगने गई थीं। तब से आज तक काफी समय हो गया। जब वार्ड के विकास कार्यों की स्थिति पूछी गई तो उन्होंने चुप रहने में ही भलाई समझा। इसके बाद रुस्तम अली ने मोर्चा संभाला और बोले महिला आरक्षित सीट थी सो ये चुनाव लड़ गईं। पति को जवाब देते देख हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली पार्षद राबिया खातून फिर दरवाजे के अंदर चली गईं।
वार्ड एक दरवाजाबाहर में हर मोड़ पर समस्याएं सिर उठा कर खड़ी हैं। गड्ढों में तब्दील सड़कें हर रोज वार्ड के लोगों को सता रही हैं। इन सड़कों को आज तक बनवाने की जहमत नगर पंचायत या वार्ड की पार्षद ने गंवारा नहीं समझा। यहां भी गंदगी का ढेर है। बिजली के खतरनाक जर्जर तार लकड़ी के खंभों पर दौड़ाए गए हैं। इससे हर पल विद्युत आपूर्ति के वक्त हादसे का अंदेशा बना रहता है।