जिले के पूरेकेशवराय, लालगंज और रानीगंज में ट्रामा सेंटर का संचालन कागजों पर हो रहा है। यहां अब तक डाक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। ठेके पर कर्मचारी रखे गए हैं। किसी प्रकार का उपकरण भी नहीं खरीदा गया है। आम तौर पर ट्रामा सेंटर गंभीर मरीजों के इलाज के लिए होता है, लेकिन यहां कोई मरीज आता ही नहीं है।
मरीजों को जिला अस्पताल से ही सीधे प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है।
हादसे में घायल लोगों की जान न जाए, समय रहते बेहतर उपचार हो जाए, इसलिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर तीन साल पहले शहर से तीन किमी दूर पूरेकेशवराय, लालगंज और रानीगंज कस्बे में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया।
कागज पर तीनों ट्रामा सेंटरों का संचालन स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दिया है। शासन की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद इन ट्रामा सेंटरों में ठेके पर कुछ कर्मचारियों की तैनाती की गई है। एक भी डाक्टर तैनात नहीं हैं। पूरेकेशवराय में 12, रानीगंज में 8 व लालगंज में 14 ठेका कर्मचारी कागज पर ड्यूटी कर रहे हैं। डाक्टर न होने के कारण ट्रामा सेंटरों में कभी मरीज नहीं आते हैं। हादसे में घायल होने वाले लोगों को जिला अस्पताल से ही सीधे प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
न सिटी स्कैन न एक्सरे की व्यवस्था
जिले के तीनों ट्रामा सेंटर में भले ही ठेके पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है, मगर मरीजों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। तीनों ट्रामा सेंटर में न सीटी स्कैन की व्यवस्था है न एक्सरे की। न्यूरो के एक भी डाक्टर की तैनाती नहीं है। ऐसे में हादसे में घायल मरीजों को तत्काल जिला अस्पताल के चिकित्सक प्रयागराज रेफर कर देते हैं।
शासन के आदेश पर कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। शुरुआती दौर में ओपीडी और इमरजेंसी का संचालन किया जाएगा। जल्द ही चिकित्सकों की भी तैनाती की जाएगी।
डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।