चार दिन बाद आखिरकार तहसील प्रशासन को होश आया। तहसील प्रशासन ने क्षेत्र में जल प्लावन की स्थिति को मान लिया है। इसके लिए तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पूरी तहसील में 11 बाढ़ सुरक्षा केंद्र बना दिए गए हैं। हालांकि अभी यहां कोई रहने नहीं पहुंचा है। उधर,बरसात से घरों के गिरने का सिलसिला जारी है। तहसील प्रशासन इसकी भी रिपोर्ट बना रहा है। बरसात बंद होने के बाद भी 50 से अधिक गांवों में पानी भरा हुआ है। इसके चलते लोगों केा आने जाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उधर, एसडीएम ने बेंती जाने वाले और गोलहा मार्ग पर दुअर नाले पर बने पुल के डैमेज होने की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है।
क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में चार दिन की बरसात से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। नदियों का पानी तो गांवों में नहीं गया, लेकिन बरसात के ही पानी से गांवों में जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालांकि बुधवार से बारिश बंद हो गई है, लेकिन इसके बाद भी गांवों से पानी नहीं निकल पा रहा है। कई जगह गांव और तहसील प्रशासन के प्रयास से पानी निकालने का प्रयास किया गया लेकिन अभी भी 50 गांव से अधिक पानी में डूबे हुए हैं। नगर पंचायत कुंडा क्षेत्र में ही तिलौरी, मनगढ़, पुरे शुक्लन का पुरवा, गड़गढ़ा, कुसेमर, पूरे गुलामचिश्ती, चकिया, चौसा, रहवई, गोगहर आदि गांवों में लोगों के घरों में पानी घुसा हुआ है। इसके अलावा कुछ गांवों में रास्ते भी पानी से डूबे हुए हैं। हालांकि बरसात बंद होने से पानी कम हो रहा है लेकिन अभी भी लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में पानी की स्थिति को देखते हुए एसडीएम ने जलप्लावन की स्थिति को मान लिया है। इसके चलते उन्होंने क्षेत्र में 11 बाढ़ सुरक्षा केंद्र बनाए हैं। हालांकि यहां उतनी सुविधाएं नहीं हैं लेकिन फिर भी इसके लिए जगह निर्धारित कर दी गई है। अगर लोगों के घर में रहने की जगह नहीं है तो वह इन जगहों पर जाकर रह सकते हैं।