गांवों में इस बार विकास विभाग पांच हजार सहजन के पौधों का रोपण करेगा। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। बीमारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विकास विभाग ने औषधीय गुणों से भरपूर पौधे लगाने का निर्णय लिया है। सबसे उपयोगी और सुलभ विकल्प के रूप में सहजन को चुना गया है। पौधरोपण का कार्य मनरेगा मजदूर करेंगे।
जिले के 17 ब्लॉकों के पांच-पांच गांवों में पौधरोपण करने का लक्ष्य शासन ने दिया है। ग्राम्य विकास विभाग ने औषधीय गुणों से भरपूर पौधों को लगाने का निर्णय लिया है। वन विभाग ग्राम्य विकास विभाग को पांच हजार सहजन के पौधे उपलब्ध कराएगा। चिकित्सकों के अनुसार सहजन एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। जिसकी पत्तियां, फल और छाल कई रोंगों में लाभकारी माना जाता है।
सहजन के प्रयोग करने से मोटापे के साथ नसों के ब्लॉकेज व रक्तचाप जैसी बीमारियों में काफी लाभ मिलता है। स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए मनरेगा मजदूरों के माध्यम से गांव-गांव पौधे रोपे जाएंगे। मानसून सीजन के जून के माह में पौधों के वितरण काय कार्य शुरू कर दिया जाएगा। बारिश के दिनों में पौधे लगाए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 50-50 पौधे रोपित किए जाएंगे।
पौधरोपण के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डीसी मनरेगा अश्वनी सोनकर ने बताया कि इस बार औषधीय पौधों के रूप में सहजन को चुना गया है। वन विभाग से पौधों की उपलब्धता होने पर गांव-गांव रोपण का कार्य मनरेगा मजदूर करेंगे।