प्रतापगढ़। शहर में अंबेडकर चौराहे से शहीद उद्यान तक सड़क के दोनों तरफ सजने वाली सब्जी मंडी रविवार को नगरपालिका ने उजाड़ दी। नगर पालिका प्रशासन की तरफ से करीब दस साल पहले सब्जी दुकानदारों को सड़क किनारे दुकान लगाने के लिए दस से पंद्रह हजार रुपये में पटरी बेची गई थी। इसके अलावा नगर पालिका हर महीने दुकानदारों से किराया भी वसूलती रही। अब अचानक हुई इस कार्रवाई दुकानदारों में भारी आक्रोश है। हालांकि नगर पालिका का दावा है कि किसी को व्यवसाय करने से नहीं मना किया गया है। सिर्फ दुकानदारों का पटरी पर हुआ स्थायी निर्माण हटाया गया है।
नगर पालिका प्रशासन ने करीब बारह साल पहले अंबेडकर चौराहे से शहीद उद्यान पार्क तक सड़क के दोनों तरफ पटरी का निर्माण कराया था। धीरे-धीरे दुकानदारों ने सब्जी समेत अन्य सामानों की दुकानें सजा लीं। नगर पालिका ने दुकानदारों को रुपये लेकर पटरी पर स्थान आवंटित कर दिया। धीरे-धीरे यहां पूरी सब्जी मंडी बस गई। अंबेडकर चौराहे से जजेज कालोनी तिराहे तक पटरी पर सब्जी की दुकानें सजाई जाने लगीं। शहीद उद्यान के किनारे खाने-पीने की दुकान सजती रहीं। दस दिसंबर को नगर पालिका ने अतिक्रमण हटाने के दौरान पटरी पर गुमटी रखकर कब्जा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया। यहां दुकानदारों ने पटरी पर पक्का निर्माण भी कर लिया था। सभी दुकानदारों को रविवार तक पटरी पर रखी गई गुमटी, टीनशेड हटाने का फरमान सुनाया गया।
चेतावनी दी गई थी कि यदि वे गुमटी व टीनशेड नहीं हटाते हैं तो पालिका प्रशासन जेसीबी लगातार कब्जा हटाएगा। पालिका का आदेश सुनकर दुकानदार एसडीएम सदर मोहनलाल गुप्ता से मिले, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। बाद में दुकानदारों ने जनप्रतिनिधियों से अपना दर्द साझा किया। फिर भी दुकानदारों को केवल आश्वासन ही मिला। पालिका के आदेश के चलते शनिवार की रात से ही दुकानदार अपनी गुमटी समेत टाट छप्पर हटाने लगे। रविवार की सुबह भी पटरी दुकानदार अपनी दुकानें हटाते रहे। नगर पालिका के रवैए उनमें भारी आक्रोश है।
दुकानदारों का कहना है कि यदि यही करना था तो पहले पटरी की जमीन की कीमत क्यों ली गई। दुकानदार कल्लू यादव, सब्जी कारोबारी मुमताज, बाबूलाल ने नगर पालिका की रसीद दिखाते हुए बताया कि उन लोगों ने रुपये देकर पटरी पर स्थान आवंटित कराया था। सब्जी कारोबारी उमेश यादव, हीरा ने बताया कि उन लोगों को बताया गया था कि पटरी पर वह अपने तरीके से दुकान लगा सकते हैं। वह चाहे तो पक्का निर्माण भी करा सकते हैं। करीब 47 दुकानदारों से 11,126 से 20,252 रुपये लेकर नगर पालिका ने स्थान आवंटित किया था।
पटरी पर तीन तरह से बेचा गया था स्थान
नगर पालिका की ओर से दस साल पहले अंबेडकर चौराहा से शहीद उद्यान तक फुटपाथ का निर्माण कराया गया। पटरी दुकानदार मोहम्मद मुमताज व बाबूलाल के अनुसार पालिका प्रशासन ने पटरी दुकानदारों को तीन साइज में स्थान बेचा था। जिसके लिए अलग-अलग कीमत निर्धारित की गई थी। छोटे स्थान के लिए 12 हजार, बीच वाले स्थान के लिए 16 हजार और सबसे बड़े स्थान के लिए 20 हजार रुपये दुकानदारों से लिए गए थे।
लाकडाउन में भी पटरी दुकानदारों ने चुकता किया किराया
अंबेडकर चौराहे से शहीद उद्यान तक पटरी दुकानदारों को बेची गई थी। पहले पंजीकरण के नाम पर दुकानदारों से स्थान के हिसाब से रुपये लिए गए। रसीद देने के बाद सभी दुकानदारों से स्थान के हिसाब से 126 रुपये से लेकर 250 रुपये हर माह किराया लिया जाता रहा। लाकडाउन में बंदी के बावजूद दुकानदारों को किराया जमा करना पड़ा।
अंबेडकर चौराहे से शहीद उद्यान तक पटरी पर दुकान लगाने के लिए दुकानदारों को स्थान आवंटित किया गया था। चूंकि उस समय नगर पालिका बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्ताव के बाद पटरी पर दुकान लेने के लिए निर्धारित प्रीमियम जमा कराया गया था। दुकानदार पटरी पर अपनी दुकान लगाकर व्यवसाय कर सकते हैं, लेकिन वहां स्थायी निर्माण नहीं कर सकते। सभी को स्थायी निर्माण हटाने के लिए कहा गया था। कारोबार करने से मना नहीं किया गया है। -मुदित सिंह, ईओ, नगर पालिका