स्वयं सहायता समूह का लाखों रुपये डकारने के बाद फर्म संचालक फरार हैँ। पुष्टाहार तैयार करने के लिए खाद्य आपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी फर्म संचालकों की ओर से की गई है। यही नहीं वाहन चालकों की हड़ताल के बहाने जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) और ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) भी मोबाइल बंद कर दिया है। टीएचआर प्लांटों में ताला लटकने से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं खुद को ठगा महसूस कर रही है।
जिले के कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हर महीने दिया जाने वाला पुष्टाहार जिले में ही तैयार करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से सात टीएचआर प्लांट की सथापना कराई जा चुकी है। इनके संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी गई है।
प्लांट की स्थापना के बाद पुष्टाहार बनाने में प्रयोग होने वाले खाद्य पदार्थ की आपूर्ति करने के लिए जिम्मेदारों ने शासन की गाइड लाइन दरकिनार कर चहेते फर्म संचालकों का चयन कर लिया । उनके खाते में टीएचआर प्लांट की एओपी (एसोसिएशन ऑफ पर्सन) के बैंक खाते से 40 से 50 लाख रुपये ट्रांसफर करा दिए। आरोप है कि इसके बाद स्वयं सहायता समूहों की धनराशि का फर्म संचालक और जिम्मेदार अफसरों ने बंदरबांट कर लिया।
करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी प्लांट का संचालन नहीं किए जाने से समूह की महिलाएं परेशान हैं। खास बात यह कि फर्म संचालक भी नदारद हैं और डीएमएम, बीएमएम हड़ताल के बहाने मोबाइल स्विच ऑफ कर घर बैठे हैं।
डीसी के नेतृत्व में नामित की गई हैं फर्म
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के डीएमएम व बीएमएम के मुताबिक टीएचआर प्लांट पर खाद्य सामग्री आपूर्ति करने के लिए डीसी एनआरएलएम के नेतृत्व में अलग-अलग फर्म नामित की गई हैं। शासन की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर फर्म चयनित की गई हैं।
टीएचआर प्लांट पर अब तक खर्च की गई धनराशि का विवरण डीसी एनआरएलएम से मांगा गया है। इसका सत्यापन कराया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नवनीत सेहारा, सीडीओ।