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संयोग था कि नहीं फटा सिलेंडर, वरना और भयानक होता मंजर

Fri, 19 Jun 2015 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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होटल गोयल रेजीडेंसी के ऊपरी तलों पर लोगों के रुकने के लिए कुल 32 कमरे बने हैं। शुक्रवार सुबह होटल में आग लगने के कारण आगंतुक रजिस्टर और रिसेप्शन पर रखा कंप्यूटर भी जलकर राख हो गया। इससे होटल में ठहरने वालों लोगों की संख्या का सही पता नहीं चल सका। अनुमान लगाया जा रहा है कि होटल के सभी कमरे बुक थे। शहर में आने वाले ज्यादातर लोग यहीं आकर ठहरते थे। होटल के ऊपरी तल को पूरी तरह से शीशे से पैक कर दिया गया है। कहीं कोई खिड़की भी नहीं है। इसके कारण सुबह जब हादसा हुआ तो लोगों की आवाज बाहर नहीं आ सकी। लोग अंदर से मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। नीचे और ऊपर के दरवाजे भी बंद थे। इस बीच मार्निंगवाक पर निकले कुछ लोग उधर से गुजरे।
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 ग्राउंड फ्लोर पर बने होटल आर्यन में आग की लपटें देखकर उन्होंने शोर मचाना शुरू किया। इस पर आसपास के लोग भागकर मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही सीओ सिटी एमपी सलोनिया के साथ ही फायरकर्मी मौके पर पहुंचे। हालांकि आग की लपटें और धुआं देखकर किसी की अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। फायर कर्मियों ने किसी तरह आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। इस बीच मोहल्ले के दर्जनों युवक वहां पहुंच गए। हिम्मत दिखाते हुए सभी सीढ़ी से ऊपर बालकनी में पहुंचे और शीशा तोड़ना शुरू किया। तब जाकर बचाव कार्य में तेजी आ सकी। मोहल्ले के लोगों ने अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजना शुरू किया। शार्ट सर्किट के कारण आग नीचे स्थित आर्यन रेस्टोरेंट में लगी थी। इसके बाद पूरे होटल में धुआं फैल गया। कुछ कमरों में भी आग लग गई। नीचे रेस्टोरेंट में कई सिलेंडर रखे हुए थे। संयोग रहा कि सिलेंडर में ब्लास्ट नहीं हुआ, वरना मंजर और भयानक होता। आग के बीच से स्थानीय युवकों और फायर कर्मियों ने किसी तरह सिलेंडर बाहर निकाला।


होटल गोयल रेजीडेंसी में सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आर्यन रेस्टोरेंट है। इसके ऊपर के दो तलों पर लोगों के ठहरने के लिए करीब 32 कमरे बने हुए हैं। दोनों फ्लोर पर प्रवेश द्वार पर शीशे का दरवाजा लगा है। जबकि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर शटर लगा हुआ है। शुक्रवार सुबह जब हादसा हुआ तो तीनों दरवाजे बंद थे। ऐसे में लोग परेशान हो गए। दम घुटने के कारण बेचैन लोगों ने बाहर भागने का प्रयास किया, लेकिन रास्ता नहीं था। ऐसे में लोग बेहोश होने लगे। स्थानीय युवकों ने जब बालकनी से आकर शीशा तोड़ा तब जाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ।
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होटल गोयल रेजीडेंसी के ठीक बगल में ही शंशाक होटल है। बड़ी संख्या में लोग इस होटल में भी ठहरे हुए थे। शुक्रवार सुबह जब हादसा हुआ तो यहां भी अफरातफरी मच गई। बगल के होटल में आग लगने और धुआं फैलने की जानकारी होने पर कमरों में ठहरे लोग इधर-उधर भागने लगे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। इस बीच प्रशासन भी पहुंच गया। तत्काल होटल को खाली करा लिया गया। होटल के बाहर सड़क पर लोगों का मजमा लग गया। जैसे-जैसे खबर फैली भीड़ बढ़ती गई।
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