चिलबिला जंगल में रविवार दोपहर अचानक आग लग गई। तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आग की लपटें जंगल के बीच में स्थित सांईदाता कुटी तक पहुंच गई। महज दस मिनट में आग ने पांच कुटिया के साथ फजीहत खाने में रखा भंडार जलाकर राख कर दिया। आठ घंटे बाद भी फायरब्रिगेड के तीन वाहन आग बुझाने में मशक्कत करते रहे। जंगल के करीब डंडवा बस्ती में आग रोकने के लिए ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल रखा था।
चिलबिला जंगल में दोपहर बारह बजे अचानक पूर्वी छोर से आग लग गई। देखते देखते तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। यह देख लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस के साथ ही फायरब्रिगेड को दी। जब तक फायरब्रिगेड की टीम पहुंचती आग सांईदाता के आश्रम को अपने आगोश में ले लिया था। वहां रहने वाले सांई भक्त सामान बाहर निकालने के साथ ही आग बुझाने में जुट गए। आग जंगल के चारों ओर फैल गई। यह देख आसपास के लोग आग बुझाने के लिए प्रयास करने लगे लेकिन उनका प्रयास तेज हवाओं के साथ उडने वाली चिंगारियों के आगे फेल हो जाता। आश्रम की पांच कुटी जलाने के बाद आग ने फजीहत खाने को भी अपने आगोश में ले लिया।
जिससे आश्रम में रखा खाने पीने व रहन सहन का सामान जलने लगा। मौके पर पहुंचे फायरब्रिगेड कर्मी आग बुझाने में जुट गए। फायरब्रिगेड कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आश्रम को बचाने का प्रयास तेज कर दिया। इस दौरान पांच कुटिया पूरी तरह से जल गई। आग की विभीषिका देख हर कोई दहशत में था। बताया जाता है कि आग डंडवा गांव की ओर खिसकने लगी। इससे जंगल में आग बुझाने के लिए ग्रामीण पसीना बहाने लगे। हाथों में लाठी डंडा लेकर लोग आग की लपटों को बुझाने में जुट गए। बस्ती के लोग भी जंगल के पास मोर्चा संभाले रहे ताकि आग उनकी बस्ती तक न पहुंच सके। आठ बजे तक जंगल में लगी आग को काबू में करने के लिए फायरब्रिगेड कर्मी जूझते रहे। आग से जंगल के हजारों पेड़ जल गए। लोगों की मानें आग लगने का कारण कोई नशेडिय़ों को मान रहा था। कोई इसे महुआ बीनने वाले लोगों की करतूत बता रहा था। फिलहाल कोतवाली पुलिस मौके पर डटी हुई है।