छात्राओं ने मांग की है कि जीएनएम से पासआउट छात्राओं को भी परीक्षा व साक्षात्कार में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए।
कॉन्वेंट और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शिक्षासत्र में एक बार फिर अभिभावकों की जेब काटने की तैयारी कर ली है। पिछले सत्र के मुताबिक इस बार फीस में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इसके पीछे की वजह स्कूल संचालक महंगाई बता रहे हैं। और तो और अधिकांश स्कूलों ने पाठ्य-पुस्तकों को भी बदल दिया है। इससे अभिभावकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। नए सत्र में बिना मान्यता के ही दर्जनों स्कूल भी खुल गए हैं।
शुक्रवार यानि एक अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरूआत हो रही है। जिले के प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल, इंटर कॉलेजों के साथ ही कॉन्वेंट स्कूलों में शुक्रवार से नई कक्षा में दाखिले का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। शहर के कॉन्वेंट स्कूलों में नए शिक्षासत्र से 25 प्रतिशत फीस में बढ़ोत्तरी की गई है। डीजल का दाम बढ़ने और महंगाई के दुहाई देकर फीस बढ़ाने वाले संचालक किताब और कापी में भी कमीशन ऐंठ रहे हैं। अधिकांश कॉन्वेंट स्कूलों ने अपनी दुकानें खोल रखी हैं तो कुछ स्कूल संचालकों ने अपने को पाक-साफ बताने के लिए दुकानों से कमीशन सेट कर रखा है। स्कूल से किताब की मिलने वाली पर्ची लेकर पूरा शहर घूमने वाले अभिभावकों को सिर्फ उसी दुकान पर किताब मिलती है, जिसका नाम वह बताकर भेजते हैं। अभिभावक बेचारे अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने के लिए स्कूल संचालकों की हर बात मानने को विवश हो जाता है।
इधर, नए शिक्षासत्र में बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों की बाढ़ आ गई है। शहर के चौराहों पर लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स देखकर ऐसा लगता है कि इन स्कूलों से बेहतर शिक्षा मिलने का कोई और माध्यम नहीं है। मगर कोई भी अभिभावक उनकी वास्तविकता जानने का प्रयास नहीं करता है। हालांकि जिला प्रशासन भी इस मामले में शिथिलता बरत रहा है। पूरा शिक्षा सत्र बीत गया, मगर जिला प्रशासन ने अवैध स्कूलों के खिलाफ कोई भी अभियान नहीं चलाया। इससे स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं।