स्वयं सहायता से जुड़ी करीब दो हजार महिलाएं खेती-किसानी और पशुपालन के जरिये खुद को सशक्त बना रही हैं। वह घर पर ही रहकर साल भर में करीब एक लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं।
सदर विकासखंड के चकवनतोड़ की कविता विश्वकर्मा ने बताया कि देशी नस्ल की पांच गायों का पालन किया है। साथ ही खेती का भी काम करती हैं। उन्होंने बताया कि मामूली लागत लगाकर ठीकठाक कमाई कर रही हैं। इसी गांव की किरन सिंह भी पशुपालन करती हैं। उर्मिला सिंह, उमा सिंह, विजय लक्ष्मी सिंह, रत्ना सिंह ने भी आजीविका संवर्धन के लिए खेती और पशुपालन को अपनाया है।
सुनीता सिंह, सीमा, मंजू देवी भी खेती और पशुपालन कर रही हैं। महिलाएं जय बुढ़िया माई, कृष्णा आजीविका, एकता आजीविका, शंकर आजीविका आदि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं हैं। डीसी एनआरएलएम देव कुमार ने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाओं को खेती और पशुपालन के लिए समय-समय पर कृषि और पशुपालन विभाग की ओर से प्रशिक्षित किया जाता है। रोजगार शुरू करने के लिए महिलाओं को ऋण भी मुहैया कराया जाता है।