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किसानों की चांदी, हॉफेड खरीदेगा आंवला

Fri, 28 Nov 2014 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने जिले के आंवला उद्योग को संजीवनी देने की कवायद शुरू की है। शासन स्तर पर गठित ‘हॉफेड’ सोसाइटी को जिले में क्रियाशील करने का फैसला जिलाधिकारी ने किया है। ताकि आंवला उत्पाद उद्योग को नई पहचान मिल सके। गुरुवार को आंवला किसानों के साथ डीएम ने बैठक की। डीएम ने पखवारे भर में आंवला उत्पाद खरीदने वाली कंपनियों की साथ बैठक करने और एक बड़ी कार्यशाला आयोजित करने की बात कही।
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  मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव के निर्देश पर जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने गुरुवार को विकास भवन में आंवला किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्या सुनी। जिलाधिकारी ने किसानों से आंवला पेड़ों को नहीं काटने का अनुरोध किया। आंवला उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने का भरोसा दिया।  शासन स्तर पर गठित मार्केटिंग फेडरेशन आफ हार्टीकल्चर प्रोडक्ट (हॉफेड) को सक्रिय कर जिले के किसानों का आंवला उत्पाद खरीदने की योजना पर चर्चा की। हताश किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पखवारे भर के अंदर आंवला उत्पाद खरीदने वाली कंपनियों के साथ बैठक और व्यापक स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
उन्होंने आंवला का उत्पाद तैयार करने और किसानों को वाजिब मूल्य दिलाने के लिए शासन को कार्ययोजना तैयार कर भेजने की बात कही है। फल संरक्षण केंद्र के प्रभारी को फटकार लगाते हुए किसानों को आंवला उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया। इस मौके पर सीडीओ मनीष कुमार वर्मा, उपकृषि निदेशक डा.आरके सिंह, समाजकल्याण अधिकारी प्रवीण सिंह, जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह, संदीप कुमार, चंद्र प्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।  
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 आंवला की कई प्रजातियां हैं, मगर किसान उन्हें श्रेणियों में नहीं बांट पाता है। इसलिए सभी आंवले का दाम एक तरह ही होता है। इसलिए अब आंवले की पहचान प्रजाति से नहीं, बल्कि कोड से होगी। डीएम ने सभी प्रजातियों का कोड बनाने को कहा है।
 आंवला की बाग का जीणोद्धार कराने वाले किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलने पर गुरुवार को डीएम के सामने यह मुद्दा उठाया। उद्यान विभाग से संचालित इस योजना के तहत किसानों का चयन किया गया था, मगर लाभ नहीं दिया गया था। डीएम ने सीडीओ से जांच कराकर चयनित किसानों को लाभ देने का आश्वासन दिया।  
व्यापारी तो आंवला किसानों को चूना लगाने में जुटे ही हैं, प्रशासन भी इसमें पीछे नहीं रहा। शासन स्तर से गठित सोसायटी के बावजूद यहां मदद के नाम पर दूसरी समिति गठित कर किसानों से सदस्यता के नाम पर पांच-पांच सौ रुपये वसूले गए। मगर नतीजा सिफर रहा। डीएम ने गुरुवार को इसकी जानकारी होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए रुपये वापस करने को कहा है।
हुआ यह कि जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने विकास भवन सभागार में आंवला किसानों की बैठक बुर्लाई। उसमें इस बात का खुलासा हुआ। किसानों ने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीएम ने मदद के लिए प्रतापगढ़ पिनयोर समिति का गठन किया था। उसकी सदस्यता के लिए सभी किसानों से पांच-पांच सौ रुपये शुल्क के तौर पर लिया गया। मगर यह समिति आंवला किसानों के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बना सकी।
किसानों की जुबानी सुनकर जिलाधिकारी और सीडीओ मनीष कुमार वर्मा अवाक रह गए। डीएम ने सवाल किया, वह रुपये किसके पास हैं, पता करके संबंधित किसानों को वापस कर दिया जाय। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने सीडीओ को सौंपी।
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