मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में रत्ना सिंह ने भाजपा की सदस्यता भले ही ग्रहण कर ली, मगर उन्होंने अपने संबोधन में कांग्रेस के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा। उन्होंने कहा कि पूरा देश मोदी के साथ है।
मोदी और कालाकांकर राजघराने को राष्ट्रभक्त बताते हुए भाजपा में आस्था प्रकट करने की बात कही, मगर उन्होंने कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कोई भी टिप्पणी नहीं की।
राजा दिनेश सिंह ने भी 1980 में छोड़ दी थी कांग्रेस
पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह ने भी 1980 में कांग्रेस पार्टी छोड़कर जनता दल से चुनाव लड़ा था, मगर बेल्हा की जनता ने उनके इस फैसले को नकार दिया। जनता की नाराजगी का खामियाजा यह रहा कि राजा अजीत प्रताप सिंह जिले के सांसद बने और दिनेश सिंह को तीसरा स्थान मिला। हालांकि उनके चुनाव हारने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य नामित किया।
1980 में जनता दल के टिकट पर जिले से चुनाव लड़ने वाले राजा दिनेश सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस से चुनाव मैदान में कूदे राजा अजीत प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की थी, जबकि राजा दिनेश सिंह को तीसरा स्थान मिला था। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने राजा दिनेश सिंह को राज्यसभा सदस्य नामित किया था।
अधिक दिनों तक वह जनता दल में नहीं रह सके। 1984 में होने वाले लोकसभा चुनाव में वह पुन: कांग्रेस में आ गए और चुनाव में जिले के मतदाताओं ने भारी मतों से जिताकर उन्हें संसद भेजा।