प्रतापगढ़। एक तरफ जहां योजनाओं में मनमानी की जा रही है। वहीं रोगियों को भी नियमानुसार योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। इनके हक पर डाका डाला जा रहा है।
योजनाओं में लूट की सच्चाई कड़वी जरूर है, मगर सोलह आने सच भी। जिला महिला अस्पताल इसका उदाहरण है। मरीजों की सेहत को लेकर सरकार गंभीर है। रोगियों के लिए मुफ्त खाना और दूध की व्यवस्था की गई। मगर इस सुविधा का लाभ रोगियों को नहीं मिल रहा। जिन ठेकेदारों को यह काम विभाग ने दिया वह रातोंरात लखपति बनने की इच्छा पाल बैठे। रोगियों को दूध वितरण की योजना भी कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई।
सरकार ने निर्देश दिया कि मरीजों को पैकेट बंद दूध मुहैया कराया जाए। महिला अस्पताल में भर्ती महिला प्रसूताएं जो सच्चाई बताती हैं वह इस निर्देश को तमाचा जड़ रही है। सर्जिकल वार्ड के निचले तल पर भर्ती लालगंज बछवर की प्रसूता रीता, रामपुरखास की कविता शुक्ला, कोहड़ौर की मोनी व शिवाला छतरपुर अंतू की मीना और गोपालपुर की तसरीना से सच्चाई की जानकारी ली गई। इन प्रसूताओं ने बताया कि उन्हें पैकेट बंद दूध नहीं मिल रहा। एक गिलास के नाम पर गेट के पास बेहद पतला दूध दिया जाता है।
वह आधा लीटर है या एक पाव उन्हें यह नहीं पता। प्रसूताओं व उनके तीमारदारों को जब ये बात पता चली कि पड़ताल अमर उजाला के लोग कर रहे हैं तो वह चौंक गए। कहना था çक भइया जाइ देया, कइ दिन रहइन का बाटै, हियई इलाज होई अगर हियां लोग नाराज होइ गएन तौ और दिक्कत होइ जाईÓ। इनकी ये बातें साफ बता रही हैं कि उनका मन इन अव्यवस्थाओं से खिन्न है पर मजबूरी में वह कुछ कहना नहीं चाह रहे। विभाग के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो सीएचसी स्तर पर इस योजना का हाल और भी बुरा है।
पैकेट में दूध देने पर मरीज परेशान होंगे। क्योंकि वे उसे उबालेंगे कहां से। इसलिए खुला उबला दूध दिया जाता है। दूध में पानी की मिलावट की जांच कराई जाएगी।
संतोष तिवारी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल