जिस मोहन हाथी को प्रतापगढ़ में तमाम यातनाएं झेलनी पड़ीं, उसे मथुरा ने अपार प्यार दिया है। भगवान कृष्ण की नगरी के फरेह में स्थित एलीफैंट कनजर्वेशन एंड केयर सेंटर में मोहन न सिर्फ दुलराया है, बल्कि उसकी हालत में भी तेजी से सुधार हो रहा है। पैर-सिर और गर्दन के गहरे जख्म अब भरने लगे हैं। सुबह वह हाथियों के साथ मार्निंग वॉक पर भी जाने लगा है। दूसरे हाथियों की तरह वह रोज पांच से आठ किमी तो नहीं चल पाता, लेकिन दो किमी जरूर घुमाया जाता है। केयर सेंटर के लोगों के मुताबिक अभी भी उसके पेट और पैर में तकलीफ है। कमजोरी भी है, लेकिन जल्द ही वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा। अभी उसकी उम्र भी 50 से 55 के बीच ही है। ऐेसे में चिंता जैसी कोई बात नहीं है।
लालगंज के पतुलकी गांव में भूपेंद्र नारायण मिश्रा के यहां करीब 45 साल तक कैद रहने वाले मोहन हाथी को वन विभाग बड़े बवाल के बाद कब्जे में ले सका था। भूपेंद्र नारायण मिश्रा पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्राणी हाथी को कैद रखने, बिना लाइसेंस अपना पालतू बताने और हाथी द्वारा तबाही मचाने के बाद भी उसे वन विभाग को नहीं सौंपने के आरोप थे। इस मामले में लालगंज कोतवाली में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 2007 और 2013 में मोहन हाथी द्वारा काफी तबाही मचाने के बाद करीब डेढ़ साल पहले वन विभाग की टीम ने उसे पहली बार कब्जे में लेने का प्रयास किया था, लेकिन आरोपियों ने बल प्रयोग कर हाथी को वन विभाग से अपने कब्जे में ले लिया था। इस दौरान मोहन को काफी चोटें आईं। 21 जुलाई 2016 को दोबारा वन विभाग ने मोहन को कब्जे में लिया था। वन अधिकारियों के मुताबिक, मोहन को बुरी तरह पीटा गया था।
उसकी आंखों को क्षति पहुंची थी। पैरों और पेट में भी चोट थी। कुछ दिनों तक वन विभाग ने उसे चिलबिला के जंगल में रखा। इस बीच भूपेंद्र की तरफ से मोहन को ‘सुपुर्दगी’ में लेने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, लेकिन उसे नकार दिया गया। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मोहन को कैद रखने वालों की तरफ से एफआईआर खारिज करने के लिए दायर की गई याचिका भी खारिज कर दी। वन विभाग के अधिकारियों ने बाद में मोहन को मथुरा के एलीफैंट कनजर्वेशन एंड केयर सेंटर भेज दिया। बेहतर इलाज और
सेंटर के लोगों की देखभाल के बाद उसकी सेहत में अब उम्मीद के मुताबिक सुधार हो रहा है। पैर में गंभीर चोटों से भारी तकलीफ में रहने वाला मोहन अब चलने-फिरने लगा है। एलीफैंट कनजर्वेशन एंड केयर सेंटर फरेह के डायरेक्टर बैजूराम एमवी ने बताया कि मोहन का लगातार इलाज चल रहा है। उसके जख्म धीरे-धीरे भर रहे हैं।
डीएम-एसपी और 10 थानों की फोर्स की मदद से कब्जे में ले सका था वन विभाग
पहली बार मोहन हाथी को कब्जे में लेने के बाद उसे कैद रखने वाले लोगों ने बल प्रयोग कर छुड़ा लिया था। इस दौरान आसपास के गांवों के लोग भी उनके समर्थन में आ गए थे। इसे देखते हुए दूसरी बार जिला प्रशासन ने मोहन को कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। बवाल की आशंका से 10 थानों की फोर्स और पीएसी लगाई गई थी। खुद डीएम और एसपी भी मौके पर थे। इसके बाद भी मोहन को कब्जे में लेने में वन विभाग को 20 घंटे से अधिक का समय लग गया।
डीएम-एसपी की मदद से दस थानों की फोर्स और पीएसी के साथ 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद