प्रतापगढ़। कुंडा, रानीगंज, पट्टी और लालगंज में बने विद्युत उपकेंद्रों से तहसील मुख्यालयों का अंधेरा तो दूर होगा ही, वहां रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी। इन उपकेंद्रों से केवल तहसील मुख्यालय के सरकारी दफ्तरों व स्थानीय लोगों को ही कनेक्शन मिलेगा। उपकेंद्रों पर एडवांस तकनीक वाले यंत्र लगाए गए हैं।
जिसका लाभ वहां के आम लोगों को मिलेगा। ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने की खबर फौरन उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों को मिल जाएगी। कई साल पूर्व बने विद्युत उपकेंद्रों पर पुरानी मशीनें लगी हैं। उन यंत्रों से विद्युत आपूर्ति तो हो जाती है, मगर कहीं कोई खराबी आने की जानकारी किसी को नहीं हो पाती।
कुंडा, रानीगंज, पट्टी व लालगंज में बने जिन नए उपकेंद्रों का उद्घाटन सोमवार को हुआ उनमें आधुनिक तकनीक वाली मशीनें लगाई गई हैं। इन उपकेंद्रों से जुड़े ट्रांसफार्मरों के जलने या तार टूटने पर मुहल्ले के लोगों को शिकायत कर बिजली कटवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फाल्ट आते ही अपने-आप उपकेंद्र के मशीनों में लगी सेंसीविटी प्वाइंट कंपन से गिर जाएगा। इसके गिरते आपूर्ति ट्रिप कर जाएगी। ट्रिपिंग होते ही अधिकारी या कर्मचारी समझ जाएंगे कि संबंधित फीडर से जुड़े ट्रांसफार्मर में खराबी आ गई है या फिर कहीं पर तार टूट गया है।
इन नए उपकेंद्रों के चालू हो जाने के बाद उन तहसील मुख्यालयों की बिजली आपूर्ति में काफी सुधार हो जाएगा। लोड के कारण फीडर ठप होने की समस्या से निजात मिल जाएगी। यहां यह बताना जरूरी है इन नए उपकेंद्रों से केवल तहसील स्तरीय सरकारी कार्यालयों व तहसील मुख्यालय पर रहने वाले आम लोगों को ही कनेक्शन मिलेगा। तहसील मुख्यालयों पर बिजली व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद जाहिर है कि व्यापारी छोटे-मोटे कल कारखानों को स्थापित करने में धन लगाने से पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि तहसील मुख्यालयों का विकास तो होगा ही बेरोजगारी भी दूर होगी।