भूकंप के झटके से सरकारी कार्यालयों में भगदड़ मच गई। कचहरी, कोर्ट, बैंक, अस्पताल, डाकघर और स्कूलों में लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहली बार झटका लगा तो कचहरी परिसर में कार्यालयों में कुर्सी, मेज हिलने लगे। दुकानों पर रखी गिलास, जग आदि झटके की वजह से गिरने लगे। लोगों ने दुकानों और कार्यालयों से बाहर भागना शुरू कर दिया। कचहरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। न्यायालय का हाल इससे भी खराब था। जान बचाने के चक्कर में लोग कोर्ट की सीढ़ियों पर गिर पड़े। भीड़ का ऐसा रेला आया कि सीढ़ियों पर वादी, प्रतिवादी वकील सभी लोग फंस गए। हर किसी को कोर्ट की इमारत से बाहर निकलने की जल्दी थी। लोग खुले स्थान पर आकर जमा हो गए। कचहरी परिसर में बने सरकारी कार्यालयों का यही हाल रहा।
बैंकों में भूकंप के झटके से हड़कंप मच गया। एसबीआई की मेन शाखा में गेट पर लगे चक्करदार दरवाजे में लोग फंसकर गिर पड़े। कर्मचारी और ग्राहक सभी बिल्डिंग छोड़कर बाहर निकल आए। कटरा गुलाब सिंह में बीओबी व ग्रामीण बैंक के प्रवेश द्वार पर लगी जंजीर में फंसकर लोग जमीन पर गिर पड़े। स्वास्थ्य महकमे के कार्यालयों के बाबू पहले भवन छोड़कर भागे। सरकारी स्कूलों का भी कमोवेश यही हाल रहा। जर्जर भवन से बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। तीन मंजिला प्रधान डाकघर से नीचे आने वाले कर्मचारियों की हालत खराब हो गई। कुछ तो सांस के मरीज थे।