शहर के जीआईसी मैदान में सर्द मौसम में पड़ने वाली पानी की बूंदों पर गायत्री परिवार की आस्था भारी पड़ी। कार्यक्रम के दूसरे दिन हुए 51 कुंडीय देव पूजन में हवन करने के लिए महिलाओं और पुरुषों का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में आए भक्तों को अपनी बारी के लिए काफी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। शनिवार को आसमान में छाए बादल और रुक-रुक कर पड़ने वाली पानी की बूदें भक्तों को ऐसे डरा रही थीं कि मानों आसमान से छूटने वाली बूंदे कार्यक्रम स्थल को लबालब कर देंगी। मगर गायत्री परिवार के भक्तों का अटूट विश्वास रहा कि वे हवन कुंड के पास से हिले भी नहीं।
शहर और ग्रामीण इलाकों से पहुंचने वाले भक्त कभी जीआईसी मैदान के विशाल पंडाल में बने हवन कुंड को देखते तो कभी आसमान में छाए बादलों को एकटक निहारते। दोपहर करीब साढे़ बारह बजे एकबारगी तो ऐसा लगा आसमान से छूटी पानी की बूंदे कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न कर देंगी। इसी बीच शांतिकुंज हरिद्वार से आए नरेंद्र विद्यार्थी ने गायत्री मंत्र का उद्घोष करना प्रारंभ किया। फिर क्या था, देखते ही देखते आसमान से बादल छंट गए। दोपहर करीब दो बजे तक देव पूजन कर भक्तों से एक-एक गलत आदतों को सुधारने का संकल्प दिलाया गया। गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य ट्रस्टी चंद्रिका प्रसाद सिंह और राम अकबाल सिंह के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ हवन-पूजन कार्यक्रम कई चरणों में हुआ। शाम करीब तीन बजे हुई प्रज्ञा पुराण कथा में नरेंद्र विद्यार्थी ने सुखमय जीवन का टिप्स दिया। इस मौके पर उमेश त्रिपाठी, राजनारायण सिंह, भीम सिंह, राम प्यारे, अरविंद, पवन सिंह आदि मौजूद रहे।