अवकाश के लिए प्रमाण पत्र जारी करने वाले चिकित्सकों को अब तीन साल तक रखना होगा रिकाॅर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। एमबीबीएस डॉक्टर यदि किसी मरीज को अवकाश के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करते हैं तो उनके सारे रिकॉर्ड तीन साल तक अपने पास सुरक्षित रखना होगा। ऐसा न करने वाले डॉक्टरों के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। जांच में खामियां मिलीं तो डॉक्टर की मान्यता तीन से पांच साल के लिए निलंबित की जा सकती है। साथ ही प्रैक्टिस पर भी रोक लगाई जा सकती है।
बीमारी के दौरान छुट्टी के लिए लोग किसी एमबीबीएस डॉक्टर के पर्चे पर दवा लिखाकर अवकाश लेते हैं। बाद में उन्हें मेडिकल जमा करना होता है। अब ऐसा करना डॉक्टरों के लिए मुसीबत बन सकता है। क्योंकि इंडोर में भर्ती मरीज का डॉटा तीन साल तक सुरक्षित रखना होगा।
अगर मरीज या कोई विधिक संस्था रिकार्ड मांगती है तो उसे पांच दिन में उपलब्ध कराना डॉक्टर की जिम्मेदारी होगी। यदि डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगता है और जांच में उसकी पुष्टि होती है तो उनका लाइसेंस भी तीन से लेकर पांच साल तक के लिए निलंबित हो सकता है।
इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने नियमावली जारी की है। इस नियमावली में डॉक्टरों के पंजीकरण, चिकित्सा व्यवसाय, मरीज के प्रति जिम्मेदारी, दवा विक्रय की स्थिति समेत प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से चर्चा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि निजी प्रैक्टिस में लगे डॉक्टर मरीज के अंतिम विजिट से अगले तीन साल तक उसका रिकाॅर्ड सुरक्षित रखेंगे। यह भी कहा गया है कि रिकाॅर्ड को कंप्यूटराइज करा लिया जाए। जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और मांगे जाने पर पांच दिन के अंदर उपलब्ध करा दिया जाए।
एनएमसी की गाइडलाइन लागू है। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही एक साल का रिकाॅर्ड रखने का नियम है। निजी अस्पताल भी इंडोर भर्ती मरीजों का विवरण रखते हैं। नए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाना गैर पेेशेवर व भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
-डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।