जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में जर्जर और बदहाल पड़े शौचालयों की चौथे और चौदहवें राज्य वित्त के पैसे से मरम्मत कराई जाएगी। रविवार को ‘अमर उजाला’ में स्कूलों में शौचालयों की दशा को लेकर ‘सो रहे जिम्मेदार, बेटियां हो रहीं शर्मसार’ शीर्षक से खबर छपने के बाद आखिरकार अफसरों की नींद टूटी। जिलाधिकारी ने खबर का संज्ञान लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने विद्यालयों के शौचालयों में ताला लगाने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। साथ ही जिला पंचायत राज अधिकारी को शौचालयों की दशा में सुधार के लिए तत्काल सर्वे शुरू कराने के साथ ही कार्ययोजना बनाने को कहा है।
जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शौचालयों की दशा बेहद खराब है। कहीं शौचालय में ताला लगा है तो कहीं ये झाड़-झंखाड़ के चलते बदहाल पड़े हैं। इसके अलाव कहीं सीट गायब है। इसके चलते छात्राओं को शर्मसार होना पड़ रहा है। प्रसाधन के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है। रविवार के अंक में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता के साथ उठाया था। खबर का असर रहा कि जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह ने बीएसए अजय सिंह को तलब कर फटकार लगाई।
डीएम ने डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव को तलब कर पूछा कि चौथे और चौदहवें वित्त की 50 प्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायतों की परिसंपत्तियों के रखरखाव पर खर्च होनी चाहिए। विद्यालय भी ग्राम पंचायतो की संपत्ति हैं, फिर शौचालय क्यों बदहाल पड़े हैं। उन्होंने डीपीआरओ से तत्काल ऐसे स्कूलों का सर्वे कराने के साथ ही कार्ययोजना बनाने के लिए कहा जिससे उनकी मरम्मत का काम शुरू हो सके। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। बता दें कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान ज्यादातर विद्यालयों को ही बूथ बनाया जाता है। ऐसे में पोलिंग पार्टियों में शामिल चुनावकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।