यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर शिक्षक दो खेमों में बंट गए हैं। वित्तविहीन शिक्षक संघ के साथ ही माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई, पांडेय और चेतनारायण गुट के शिक्षक अभी भी मूल्यांकन केंद्रों में बहिष्कार कर रहे हैं। वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मागुट) और राजकीय शिक्षक संघ मूल्यांकन में जुट गए हैं। रविवार से शुरू मूल्यांकन कार्य में सोमवार को तेजी आ गई है।
जीआईसी में वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष लालकृष्ण प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षकों के साथ सरकार विश्वासघात कर रही है। सरकार ने वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन वह अपने वादे से मुकर गई है। शिक्षक नेता धर्मराज सिंह ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को नजरअंदाज करने की कीमत सरकार को चुकानी होगी। माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र शुक्ल ने कहाकि वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण सिर्फ दो मांगें प्रमुख हैं। कोषाध्यक्ष उमेश त्रिपाठी ने कहा कि अगर सरकार ने तदर्थ शिक्षकों को नियमित करने के लिए जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में शिक्षक साथी सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।
तदर्थ शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक श्याम शंकर उपाध्याय ने कहा कि शिक्षकों के आंदोलन से सरकार सहम गई है। इन्होंने शिक्षकों को विश्वास दिलाया कि जल्द ही शुभ समाचार मिलेगा। इस मौके पर गंगा प्रसाद पांडेय, शिवाकांत, डॉ. रंजना मिश्रा, रेखा सिंह, ऊषा पांडेय, दीपिका तिवारी, शैल मौर्य, निशा सिंह, संतोष सिंह, अजीत पटेल, दुर्गा प्रसाद, केशवराम ओझा, पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।