देश को आजाद कराने में जेल की सजा काटने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मातापलट पांडेय का बुधवार की सुबह साढे़ पांच बजे निधन हो गया। वह सौ वर्ष के थे। उनके निधन की जानकारी होने पर गांव के लोग उमड़ पड़े। सीओ रानीगंज और तहसीलदार ने गांव पहुंचकर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के निधन पर राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और कांग्रेस के प्रदेश महासचिव श्याम किशोर शुक्ल ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।
जिले के कंधई इलाके के छींटपुर गांव निवासी मातापलट पांडेय (100) स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। बुधवार की सुबह करीब साढे़ पांच बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शाम को वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी तीन बेटियां केवला देवी, विमला देवी और निर्मला देवी हैं। बुधवार की सुबह उनके निधन की जानकारी होते ही अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। रानीगंज सीओ और तहसीलदार ने गांव पहुंचकर गॉर्ड ऑफ आर्नर की सलामी दी।
ब्रिटिश सेना में बगावत कर आजाद हिंद फौज के बने थे सिपाही
ब्रिटिश सेना के नेवी में तैनात रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मातापलट ने बगावत कर आजाद हिंद फौज में सिपाही बने थे। देश को आजाद कराने के लिए तीन साल तक कारागार में बंद रहने वाले भारत मां के इस सपूत ने अंग्रेजों के सामने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया। कंधई इलाके के छींटपुर गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माता पलट पांडेय ब्रिटिश नेवी में भर्ती थे। देश से अंग्रजों के भगाने के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आजाद हिंद फौज के गठन के बाद वह ब्रिटिश सेना में बगावत कर आजाद हिंद फौज के सिपाही बन गए। अंग्रेजों ने उन्हें नसीराबाद से गिरफ्तार कर नैनी, प्रतापगढ़ के जेलों में तीन वर्ष तक कैद रखा। देश के आजाद होने के बाद भारतीय सेना में भर्ती होकर 13 वर्षों तक उन्होंने देश की सेवा की। । मातापलट की बहादुरी के कायल सेना के अधिकारियों ने दो-दो पेंशन स्वीकृत कर रखी थी। केंद्र और राज्य की ओर से मिलने वाली पेंशन के साथ ही गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यालय पर मिलने वाले सम्मान से वह बेहद गदगद रहते थे।