संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। संक्रामक रोगों और मच्छर जनित रोगाें की रोकथाम के लिए होने वाली कवायद सिर्फ कागज पर है। अधिकारी संचारी रोगों से बचाव की चर्चा ही करते रहे और जिले में डेंगू और मलेरिया को मरीज दोगुने हो गए हैं। पिछले वर्ष मच्छर जनित बीमारियों से बढ़ी पीड़ितों की संख्या से स्वास्थ्य विभाग ने सबक नहीं लिया। अधिकारी बैठकों में व्यस्त रहे और अभी तक 11 मलेरिया और 60 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुना है।
शासन की कड़ाई के बाद स्वास्थ्य विभाग डेंगू संक्रमित मरीजों के आंकड़ों को पोर्टल पर दर्ज करने में हिचक रहा है। सीएमओ के मुताबिक जिले में अभी तक डेंगू 11 पुष्ट मरीज हैं। इतनी ही संख्या मलेरिया पीड़ितों की बताई गई है। संक्रमितों का यही आंकड़ा पोर्टल पर दर्ज है। जबकि जिले में डेंगू के 60 संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनका प्रयागराज समेत निजी अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। कुछ मरीज ठीक होकर घर भी जा चुके हैं।
बरसात में मच्छर जनित रोगों के फैलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हर साल मरीज बढ़ रहे है, लेकिन बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते। इंतजाम के नाम पर बैठकों में कागज का कोरम पूरा किया जाता है। इसका सीधा असर बीमारियों की रोकथाम पर पड़ रहा है। ऐसे में न तो लोग जागरूक होते हैं और न ही जिम्मेदार गंभीरता दिखाते हैं। आंकड़े भी जिम्मेदारों की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं।
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पिछले वर्षों में मलेरिया के रोगियों की संख्या
2021 में 9
2022 में 12
2023 में अभी तक 11 मलेरिया के रोगी मिले।
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जिले में यह है डेंगू की स्थिति
वर्ष 2021 में 125 डेंगू के मरीज मिले थे।
वर्ष 2022 में 235 डेंगू के मरीज मिले थे।
2023 में अभी तक 60 डेंगू के मरीज मिले हैं।
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सीएचसी पर भेजा गया एंटी लार्वा कीटनाशक
जनपद के सभी सीएचसी पर मच्छरजनित रोगों और संक्रामक रोगों को रोकने के लिए 10- 10 लीटर एंटी लार्वा कीटनाशक भेजा गया है। इसका छिड़काव रोगों की रोकथाम के लिए किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में डेंगू, मलेरिया जांच के साथ ही मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए वार्ड तैयार हैं। जो मरीज आ रहे हैं उन्हें भर्ती कर इलाज भी किया जा रहा है।
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डेंगू के लक्षण
सिरदर्द
मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द
उल्टी,जी मिचलाना
आंखों में दर्द होना
त्वचा पर लाल चकत्ते होना
प्लेटलेट काउंट कम होना
मसूड़ों या नाक से रक्तस्राव
मूत्र, मल या उल्टी में खून आना
सांस लेने में कठिनाई
थकान महसूस करना
चिड़चिड़ापन या बेचैनी
डेंगू से बचाव
घर के पास पानी जमा न होने दें।
कूलर और गमले का पानी प्रतिदिन बदले
पानी को ढंक कर रखें। रात में सोने समय मच्छरदानी में सोए
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बुखार पीड़ितों की लगातार जांच कराई जा रही है। जो भी मलेरिया और डेंगू से पीड़ित मिल रहे हैं, उन्हें उपचार दिया जा रहा है। डेंगू और मलेरिया के मरीज कब तक मिलेंगे इसका कोई जवाब मेरे पास नहीं है। इतना जरूर है कि बचाव के लिए जहां संक्रमित मिल रहे हैं, वहां दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। हम उन मरीजों की रिपोर्ट को पुष्ट मानते हैं, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज में जांच कराई है।
डा. जीएम शुक्ल, सीएमओ