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खरीफ का लक्ष्य खत्म होने के बाद भी यूरिया की डिमांड

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demand for urea even after kharif target is over
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खरीफ का लक्ष्य खत्म होने के बाद भी जिले में यूरिया की डिमांड है। समितियों पर अभी भी किसानों की भीड़ लग रही है। अफसरों का कहना है कि जिले में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार तीन हजार हेक्टेअर अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई होने से यूरिया की मांग भी बढ़ी है।
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धान की फसल में बाली निकलने वाली है। ऐसे में किसान खेतों की सिंचाई करने के साथ ही यूरिया का छिड़काव करना चाहते हैं, मगर, जिले की साधन सहकारी समितियों पर खाद के लिए मारामारी हो रही है।
खुले बाजार और अधिकृत बिक्री केंद्रों पर खाद उपलब्ध है, मगर ऊंचे दाम पर बेची जा रही है। साधन सहकारी समितियों पर 266.50 रुपये प्रति बोरी की दर से बिक्री हो रही है, जबकि खुले बाजार में साढ़े तीन सौ रुपये में यूरिया बिक रही है। अफसरों का दावा है कि खरीफ के सीजन में 17,146 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य निश्चित किया गया था, मगर अब तक 17,444 मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हो चुकी है। सवाल यह उठता है कि जब इतनी मात्रा में यूरिया की बिक्री हो चुकी है तो अब किसान यूरिया क्यों मांग रहे हैं। इसके पीछे अफसरों का तर्क है कि पिछले वर्ष 95,000 हेक्टेअर में धान की खेती हुई थी. मगर इस वर्ष 98,000 हेक्टेअर में धान की खेती हुई है। इससे मांग बढ़ी है और लक्ष्य कम पड़ गया है।
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54 एग्री जंक्शन और दो ई-बाजार
जिले में 54 एग्री जंक्शन और दो ई-बाजार खोले गए हैं। जहां इफको की खाद की बिक्री होती है। साधन सहकारी समितियों के मूल्य पर ही इन केंद्रों से खाद की बिक्री होनी चाहिए, मगर अधिकांश दुकानदार मुनाफा कमाने के लिए अधिक दाम पर बिक्री कर रहे हैं।
जिले में लक्ष्य से अधिक खाद की बिक्री हो चुकी है। फिलहाल, खाद की कोई कमी नहीं है। अब मांग घटी है और इफको से अधिक खाद आने वाली है। अधिक दाम पर बेचने वाले दुकानदारों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
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डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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