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Pratapgarh News: संपादित<bha>--</bha>-बकायेदारों ने सहकारी बैंकों को लगाई चपत, 16.70 करोड़ से मिलेगी संजीवनी

Sun, 03 Sep 2023 08:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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ऋण लेने के बाद जाते हैं भूल, 38.21 करोड़ दबाकर बैठे बकायेदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले के बड़े बकायेदारों की ओर से कर्ज चुकता न करने पर जिला सहकारी बैंक घाटे से नहीं उबर पा रहे हैं। जिला सहकारी बैंक का 38.21 करोड़ रुपये बकाया है, मगर विभागीय अधिकारी वसूली की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। दरअसल जब बैंक अफसर वसूली के लिए दबाव बनाते हैं, तो नेताओं का फोन घनघनाने लगता है। फिर कार्रवाई ठप हो जाती है।
जिला सहकारी बैंक का व्यवसाय मुख्यत: सहकारी कृषि ऋण समितियों से चलता है। जिले की 25 शाखाओं से 172 साधन सहकारी समितियां किसानों को उर्वरक, गेहूं, धान , बीज और नकद आदि का वितरण करती हैं। समिति में जितने ज्यादा सदस्य होंगे, बैंक की साख में उतनी ही सामाजिक और आर्थिक वृद्धि होगी, साथ ही व्यवसाय भी उतना ही ज्यादा होगा।
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वर्तमान में सक्रिय सदस्यों की संख्या घटकर महज 6,142 हो गई है। जबकि वर्ष 2001 में सक्रिय सदस्यों की संख्या 42,748 थी। नए सदस्य बनाने के लिए इन दिनों अभियान चलाया गया है।
बैकों के घाटे में जाने का प्रमुख कारण बकायेदारों की ओर से समय से अदायगी न करना है। मुख्यालय स्थित शाखा में दस लाख से अधिक के बकायेदार अधिक हैं। आश्चर्य की बात यह है कि अफसर इन बकायेदारों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
बकायेदार 38.21 करोड़ रुपये दबा कर बैठे हुए हैं। हालांकि बैंक को घाटे से उबारने के लिए शासन ने 16.70 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है। इससे अब बैंक अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी हुई है।


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तैंतीस लाख के बकायेदार हैं मनोज तिवारी
जिला सहकारी बैंक में सबसे बड़े बकायेदार के रूप में कुंडा के नरियावां निवासी मनोज तिवारी का नाम शामिल है। बैंक के मुताबिक 33,84,386 रुपये बकाया हैं। पूरेठाकुर रामनगर के विनोद कुमार मिश्र से 14,99,298 रुपये और तीसरे स्थान पर शहर के दहिलामऊ निवासी संजय कुमार द्विवेदी का नाम है, जिन पर बैंक का 10,46,615 रुपये का बकाया है। बैंक ने जो बकायेदारों की सूची तैयार की है, उसमें 2145 लोगों के नाम शामिल हैं।






छोटी में दो सौ, बड़ी में पांच सौ सदस्य बनाने का लक्ष्य
सदस्यता अभियान के जरिये समितियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके लिए मानक तय कर दिया गया है। छोटी समितियों को दो सौ और बड़ी समितियों को पांच सौ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है। 30 सितंबर तक सदस्यता अभियान को पूरा करने को कहा गया है।


जिन किसानों के पास जमीन नहीं, वह भी बन सकते हैं सदस्य
समितियों का सदस्य बनने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसके पास जमीन ही होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के पास जमीन नहीं है, तो भी वह व्यक्ति सदस्य बन सकता है। दरअसल अब ग्राहक सेवा केंद्र, आंवला उत्पाद, पेट्रोल पंप और ऑनलाइन बिल जमा करने के लिए जनसेवा केंद्र समितियों पर खोले जाएंगे। इसके संचालन की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो समिति के सदस्य होंगे। जो सदस्य नहीं हैं, वह योजनाओं का लाभ नहीं ले सकेंगे।
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बैंक के घाटे की वजह बकायेदार हैं, जिन लोगों ने ऋण लिया, वह लौटाना नहीं चाहते हैं। पहले बैंक को कुर्की करके का अधिकार नहीं था. अब मिला है। बकायेदारों को कुर्की का नोटिस भेजना प्रारंभ किया गया है। शासन से 16.70 करोड़ रुपये मिले हुए हैं, उम्मीद है कि कारोबार में वृद्धि होगी और बैंक मजबूत होगा।

अनिल कुमार, महाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड
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