16 दिसंबर 2012 की वह काली रात तो याद ही होगी। कोई भूल भी कैसे सकता है। राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश में उबाल पैदा कर दिया था। इस घटना के बाद बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन आज भी हालात जस के तस हैं। रविवार को निर्भया कांड के बहाने अमर उजाला ने जिले में बेटियों की सुरक्षा की पड़ताल की तो हर उन्हें घूरतीं निगाहें नजर आईं।
सिविल लाइन स्थित बस अड्डे पर रविवार दोपहर 12.40 बजे बहुत ज्यादा भीड़ नहीं थी। चंद यात्री ही नजर आ रहे थे। कुछ युवतियां भी अपने परिजनों के साथ बस के इंतजार में खड़ी थीं। इस दौरान वहां मौजूद कुछ मनचले उन्हें घूर रहे थे। यह नजारा उधर से गुजरने वाला हर व्यक्ति देख रहा था, लेकिन किसी ने भी कुछ पूछने की जरूरत नहीं समझी। युवतियों के बस में सवार होने तक तीन मनचले वहीं खड़े रहे। उनके जाते ही वह भी वहां से चलते बने।
जिला महिला अस्पताल के आसपास रविवार को अवकाश होने के कारण मरीजों की भीड़ सामान्य दिनों के मुकाबले कम थी। कुछ युवतियां अपना इलाज कराने परिवार के साथ आई थीं। दोपहर करीब 1.15 बजे गैरजनपद से आने वाले डाक्टरों के इंतजार में खड़ीं युवतियों पर अस्पताल के इर्द-गिर्द मंडराने वाले मनचले फब्तियां कसते नजर आए। आसपास के कुछ लोगो ने उनकी बातों को सुना, लेकिन नजरअंदाज कर आगे बढ़ गए। यह कोई एक दिन की बात नहीं, बल्कि हर दिन की हालत है।
रेलवे स्टेशन पर दोपहर करीब 2.15 बजे ट्रेन पर रिश्तेदार को बैठाने आई युवती घर जाने के लिए निकली। वह स्टेशन के बाहर खड़े कई ई-रिक्शों में बैठने के बाद उतर गई। रिक्शे में पहले से सवार कुछ लोगों की घूरती निगाहों ने उसे असहज कर दिया। पैदल ही वह बाहर की ओर चल पड़ी। बाद में दूसरे रिक्शे से घर के लिए रवाना हुई। प्लेटफार्म से लेकर बाहर तक युवतियों को मनचलों की हरकतों का सामना करना पड़ता है।
शहर में महिलाओं के लिए पब्लिक टायलेट की व्यवस्था न होने से उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। घर से बाजार पहुंचकर खरीदारी करने वाली महिलाओं को टायलेट के अभाव में समस्या का सामना करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन से लेकर शहर के पंजाबी मार्केट, फलमंडी, चौक, सब्जी मंडी, कचहरी रोड पर पब्लिक टायलेट न होने से बाजार आने वाली महिलाओं, युवतियों व छात्राओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं के लिए दिक्कत को देखते हुए सपा सरकार ने 100 बेड का अस्पताल बनवाने को मंजूरी दी थी। महिला अस्पताल के पीछे बन रहे अस्पताल को 2 दिसंबर तक स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द कर देना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी भी भवन अधूरा पड़ा है। इससे इस साल अस्पताल महिला मरीजों को राहत नहीं दे सकेगा।
भले ही 6 साल पहले दिल्ली में निर्भया कांड के बाद बेटियों की सुरक्षा के लिए तमाम कानून बने हों, लेकिन अभी तक आधी आबादी अपने आपको महफूज नहीं मानती। इस साल सामूहिक दुष्कर्म व रेप की घटनाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं भी होती रहीं। कंधई में मासूम बच्ची को भी दरिंदे ने अपना शिकार बनाया। कुल 47 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं। महिला उत्पीडन के भी मामलों में इजाफा हुआ है। कालेज के बाहर छात्राओं से अश्लील हरकत पर रोक नहीं लग सकी। नगर कोतवाली की रहने वाली छात्रा के साथ अंतू में मनचले ने अपने साथियों के साथ घेरकर मारपीट की। छात्रा ने रेलमंत्री को ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
महिलाओं के सभी मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। टोल फ्री नंबर के साथ ही नजदीकी थानों में वह शिकायत कर सकती हैं। दर्ज मुकदमों की पुलिस पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाने का काम करती है। एंटी रोमियो दल बराबर मनचलों पर कार्रवाई करता है।
अवनीश मिश्र, अपर पुलिस अधीक्षक, पूर्वी।