संदिग्ध हालत में ईट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले दो मजदूरों की मौत हो गई। जबकि महिला समेत चार मजदूरों की हालत बिगड़ गई। चर्चा है कि जहरीली शराब पीने के कारण मजदूरों की मौत हुई है। काम पर जाने से पहले सभी ने शराब पी थी। एक मजदूर के शव का प्रयागराज में अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि दूसरे मजदूर के शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अचानक दो मजदूरों की मौत से जिले में हड़कंप मचा हुआ है।
कोहड़ौर थाना क्षेत्र के चंद्रभानपुर में मुन्ना पांडेय का ईंट भट्ठा है। वहां छत्तीसगढ़ और उड़ीसा से मजदूर ईट की पथाई करने के लिए आए हैं। बृहस्पतिवार की सुबह करीब आठ बजे मजदूरी करने वाले रोहित (35) पुत्र गड़ाराम निवासी ठेलकुबेदा थाना नवापाड़ा उड़ीसा की हालत बिगड़ गई।
उसे कोहड़ौर सीएचसी ले जाया गया। उसकी हालत गंभीर देख डाक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रास्ते में रोहित की मौत हो गई। यह देख उसके साथी और भट्ठे के जिम्मेदार शव लेकर प्रयागराज अंतिम संस्कार के लिए चले गए। अभी वहां से लोग भट्ठे पर लौटे नहीं थे कि शाम चार बजे भट्ठे पर काम करने वाले लैल (40) पुत्र मायाराम, कंसु (60) व उसकी पत्नी खंती (58), चिंताराम (55), बुुधेसर (45) निवासी कुलिया थाना कोमाखान जिला महासमुद छत्तीसगढ़ की हालत बिगड़ गई।
सभी को लेकर लोग अस्पताल भागे। रास्ते में लैल की सांसें थम गईं। अन्य बीमार लोगों को सीएचसी कोहड़ौर ले जाया गया। जहां से सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में कंसु व उसकी पत्नी खंती और बुधेसर का उपचार चल रहा है। जबकि चिंताराम की हालत में सुधार होने के बाद ईट भट्ठे पर ले जाया गया।
दो ईट भट्ठा मजदूरों की मौत के बाद मुंशी समेत अन्य जिम्मेदार वहां से भाग निकले। मृतक रोहित की पत्नी शिवानी का कहना है कि शराब पीने से उनके पति व लैल की मौत हुई। जिन लोगों की तबियत खराब हुई है, उन लोगों ने भी शराब का सेवन किया था। घटना की जानकारी के बाद कोहड़ौर पुलिस मौके पर पहुंची और लैल के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
घटना की जानकारी के बाद अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुरेंद्र प्रसाद व जिला आबकारी अधिकारी आरके सिंह मौके पर पहुंचे। एएसपी का कहना है कि मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
भट्ठे पर 50 रुपये में बेचने आते थे शराब
भट्ठा मजदूर लैल व रोहित की मौत के बाद साथ काम करने हैरान हैं। साथी मजदूर यह मान रहे हैं कि सभी लोग शराब का सेवन करने के बाद ही काम शुरू करते थे। काम करने वाली महिलाओं के अनुसार भट्ठे पर ही सप्ताह में एक-दो बार कुछ लोग बाइक से शराब झोले में भरकर लाते थे। वे एक शीशी शराब 50 रुपये में बेचते थे। इसके अलावा स्थानीय ठेके से भी जरूरत पड़ने पर मजदूर शराब खरीदकर लाते थे। हालांकि सरकारी ठेके पर देसी शराब की कीमत अधिक है।
रोहित के बेटों के सिर से छिन गया पिता का साया
भट्ठे पर मजदूरी करने के लिए रोहित दशहरा के बाद अपने परिवार के साथ आया था। रोहित की पत्नी शिवानी, बेटे बजरंग व आशीष का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि यह भी चर्चा है कि रोहित काफी दिनों से बीमार था।
शराब तस्करों को पकड़ने के बाद छोड़ दी थी पुलिस
ईट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों के अनुसार कुछ दिन पहले शराब बेचने आने वाले दो लोगों को पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ लिया था। पुलिस दोनों को पकड़कर भी ले गई। हालांकि बाद में शराब तस्करी करने वाले दोनों युवकों को छोड़ दिया। वे फिर से शराब बेचने आते रहे। लोगों का कहना है कि इलाके में शराब तस्करी का धंधा जोरशोर से चल रहा है। शराब बेचने वालों पर स्थानीय पुलिस शिकंजा कसने में नाकाम रही।