समय सीमा बीतने के बाद भी अभी तक रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। अफसर इस ओर रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कच्छपगति से निर्माण कार्य चल रहा है। अभी जो हालात हैं उसका हाल देखकर फुट ओवरब्रिज के निर्माण में सालभर का वक्त लग सकता है। फुट ओवरब्रिज न होने के चलते महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक पार कर एक से दूसरे प्लेटफार्म पर आते-जाते हैं। इससे किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
मॉडल रेलवे स्टेशन के तौर पर चुने गए प्रतापगढ़ जंक्शन पर अंग्रेजों के जमाने में फुट ओवरब्रिज का निर्माण हुआ था। इसी फुट ओवरब्रिज से पूर्वी सहोदरपुर के साथ ही स्टेशन के बाहर यात्रियों को निकलने के लिए अलग से रास्ता बना दिया गया था। काफी पुराना होने के कारण फुट ओवरब्रिज पूरी तरह से जर्जर हो गया था। ट्रेनों के आवागमन के दौरान इसमें कंपन होने लगता था। इससे हादसे की आशंका बनी रहती थी। तत्कालीन एडीईएन अर्जुन यादव ने रेलवे के आला अफसरों को पत्र लिखकर फुट ओवरब्रिज तोड़वाकर नया बनवाने की मांग की थी। मॉडल स्टेशन होने के कारण मंडल में बैठे रेल अफसरों ने स्वचालित सीढ़ी के साथ फुट ओवरब्रिज के निर्माण की अनुमति दे दी थी। इस पर पुराना फुट ओवरब्रिज तोड़वा दिया गया। नया फुट ओवरब्रिज बनाने का काम शुरू हुआ।
दावा किया गया कि जून माह के अंत तक इसे तैयार कर लिया जाएगा, लेकिन अभी आधा निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है। समय सीमा बीतने के बाद भी महज फाउंडेशन ही अफसर तैयार करवा सके हैं। इसके चलते प्रतापगढ़ स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। दो और तीन नंबर प्लेटफार्म पर आने वाली ट्रेनों को पकड़ने या फिर उससे उतरकर प्लेटफार्म से बाहर निकलने के लिए यात्रियों को अपनी जान हथेली पर रखकर ट्रैक पार करना पड़ता है। किसी-किसी दिन तो एक नंबर, मेन लाइन पर मालगाड़ी खड़ी हो जाती है। अधिकतर ट्रेनें दो और तीन नंबर पर आती हैं। ऐसे में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मालगाड़ी के नीचे से निकलने का प्रयास करते हैं। ऐसी दशा में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
दो नंबर प्लेटफार्म पर जगह कम होने के कारण फाउंडेशन तैयार करने में दिक्कते आ रही थीं। अब समस्या दूर कर ली गई है। पांच से सात माह के अंदर फुट ओवरब्रिज तैयार हो जाएगा। विभाग की ओर से निर्माण कार्य की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
संचान, एडीईएन।