जिले में जमाखोरों के खेल में उलझे दुकानदारों ने दाल की कीमत बढ़ा दी है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिले में 6670 मीट्रिक टन अरहर का उत्पादन होने के बाद भी दाम में तेजी से उछाल आ गया है। दस दिन के अंदर दाल की कीमत में 50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। दाल के बिना भोजन की थाली अधूरी लगती है। दाल कोई भी हो अरहर, उड़द, मूंग मगर उसकी विशेषता किसी से भी छिपी नहीं है। जिले में उत्पादन कम और मांग अधिक होने के कारण लोगों को महंगे दाम पर अरहर खरीदनी पड़ रही है।
अगर हम दाल के दाम की बात करें तो अरहर, उड़द और मूंग की दाल के दामों में मामूली अंतर है। फुटकर दुकानों पर आम ग्राहकों के लिए अरहर की दाल 165 रुपये, उड़द की दाल 160 और मूंग की दाल 145 रुपये प्रति किग्रा बिक रही है। जबकि दस दिन पहले अरहर के दाल की कीमत 115 रुपये किग्रा थी। इतने कम समय में लगभग पचास रुपये की हुई बढ़ोतरी से आम ग्राहकों से दाल लगभग छिन गई है। दाल की कीमत एक बार नियंत्रित होने के बाद पुन: हो रही वृद्धि से आम लोगों की नींद उड़ गई है।
जिले में प्रतिवर्ष अरहर का उत्पादन 6670 मीट्रिक टन होता है। जबकि जिले में प्रतिवर्ष 36,432 मीट्रिक टन दाल की खपत होती है। मांग अधिक और उत्पादन कम होेने के कारण दाल के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। मगर हाल में ही अरहर का उत्पादन होेने के बाद भी दाम तेजी से बढ़ना जिले के शुभ संकेत नहीं है।बाजार के जानकार बता रहे हैं कि जमाखोरी के कारण दाल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। दरअसल जिले के थोक व्यापारियों ने लाइसेंस ले रखा है। इससे यह दुकानदार सीजन में दाल की खरीदारी कर फुट विक्रेताओं को देने से हाथ खींच लेते हैं। बाहर से आने वाली दाल पर उनका नियंत्रण होता है, इससे मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण दाल के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है।