संदिग्ध हालत में सास-बहू की मौत का राज अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है। सास की मौत का कारण साफ न होने पर बिसरा जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया। जबकि विवाहिता की मौत फांसी पर झूलने से होने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम के बाद रिश्तेदार दोनों शवों को घर ले गए। मां व दादी का शव देख बच्चे बिलखते रहे। शाम को पुलिस ने हिरासत में लिए गए दिलीप को भी छोड़ दिया।
नगर कोतवाली के भोजपुर निवासी दिलीप सिंह की मां बिट्टन देवी (75) और उसकी पत्नी ऊषा देवी (45) का शव सोमवार को चारपाई पर पड़ा मिला था। दोनों की मौत की खबर लोगों ने पुलिस को नहीं दी थी। जिसे लेकर काफी देर तक पंचायत भी चलती रही। शाम को जानकारी होने पर पहुंची पुलिस ने दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने दिलीप को हिरासत में ले लिया था। मंगलवार को बिट्टन देवी और ऊषा के शवों का पोस्टमार्टम हुआ।
जिसमें बिट्टन देवी के मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजने का सुझाव दिया। विवाहिता ऊषा देवी की मौत फांसी पर झूलने के कारण होने की बात सामने आई। पोस्टमार्टम के बाद दिलीप के परिवार व रिश्तेदार शवों को लेकर घर पहुंचे। शव घर पहुंचते ही बच्चे बिलखने लगे।
कोतवाली पुलिस का कहना है कि चूंकि दिलीप घटना को लेकर बार बार बयान बदल रहा था। इसलिए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ऊषा ने खुद फांसी लगाई या कोई दूसरी वजह है। किसी ने तहरीर भी नहीं दी है। दिलीप को छोड़ दिया गया है। यदि कोई तहरीर देता है तो आगे कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों के भविष्य को लेकर नाना परेशान
नगर कोतवाली के भोजपुर निवासी दिलीप सिंह की शादी करीब दो दशक पहले ऊषा देवी के साथ हुई थी। शादी के बाद बेटी प्रिया व बेटे दिव्यांश का जन्म हुआ। बेटी की मौत के बाद भोजपुर पहुंचे हरिशरण सिंह निवासी रामपुर कोटवा थाना बाघराय बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित दिखे। उनका कहना था कि यदि दिलीप के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी तो बच्चों की परवरिश कौन करेगा।
मासूम दिव्यांश ने मां की चिता को लगाई आग
दिलीप सिंह को मां बिट्टन देवी और पत्नी ऊषा देवी की संदिग्ध मौत के चलते पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचे। काफी देर तक दिलीप के आने का लोग इंतजार करते रहे। पुलिस ने दिलीप को नहीं छोड़ा था।
जिसके बाद परिवार व रिश्तेदारों ने दोनों शवों का एक साथ अंतिम संस्कार करने की बात तय की। गांव में ही सास-बहू के शवों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। महेंद्र ने अपनी मां बिट्टन देवी और मासूम दिव्यांश ने अपनी मां ऊषा देवी की चिता को मुखाग्नि दी।