जिला प्रशासन किसानों की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। आलू और गेहूं की बोवाई के दौरान किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रही थी। और अब जब यूरिया की आवश्यकता है तो डीएपी मंगाई जा रही है। इससे साधन सहकारी समितियों से यूरिया लेने का प्रयास करने वालों को निराशा हाथ लग रही है।
गेहूं और आलू की फसल को पहली सिंचाई के बाद यूरिया की जरुरत है। मगर साधन सहकारी समितियों ने खाद देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसा समितियों में खाद नहीं होने के कारण हो रहा है। साधन सहकारी समितियों, बिक्री केंद्रों पर ही नहीं बल्कि जिले की पीसीएफ गोदाम में भी यूरिया का स्टॉक खत्म हो गया है। अभी यूरिया आने की उम्मीद भी नहीं है। ऐसे में लगभग सप्ताह भर से मुख्यालय में यूरिया की किल्लत अभी आगे भी बरकरार रहने के आसार हैं।
वहीं, अब किसानों को डीएपी की आवश्यकता नहीं रह गई है तो जिला प्रशासन डीएपी की रैक मंगवा रहा है। यह रैक शुक्रवार को बेल्हा आ रही है। मगर यूरिया की बाबत अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं।
रबी के सीजन में यूरिया का लक्ष्य 35,000 मीट्रिक टन का है। मगर अभी तक जिले को 17,300 मीट्रिक टन यूरिया मिली है। अधिकारी 5,600 मीट्रिक टन बफर में होने का दावा कर रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि साधन सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर एक दाना यूरिया नहीं है।
जिला कृषि अधिकारी प्रतापगढ़ डीपी सिंह ने बताया कि जिले में यूरिया खाद की कमी है। अधिकारियों को अवगत कराया गया है। शीर्ष अधिकारियों ने यूरिया की दो रैक भेजने का आश्वासन दिया है। हालांकि यूरिया की रैक आने के पहले शुक्रवार को डीएपी की रैक आ रही है।